टेक्नोलॉजी की दुनिया में हर दिन कुछ नया आता रहता है। कभी नया फोन लॉन्च होता है, तो कभी किसी ऐप या सॉफ्टवेयर में नया फीचर जुड़ जाता है। ऐसे बदलाव हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाते हैं। लेकिन इनके पीछे सिर्फ मशीनों का कमाल नहीं होता, बल्कि इन्हें बनाने और इस्तेमाल करने वाले लोगों की सोच भी बहुत मायने रखती है। सुंदर पिचाई टेक्नोलॉजी के फ्यूचर को लेकर काफी पॉजिटिव सोच रखते हैं। उनका मानना है कि टेक्निक हमारी जिंदगी को बेहतर बना सकती है, लेकिन इसके लिए लोगों की सोच और सही फैसले भी जरूरी हैं। यानी उनका भरोसा सिर्फ टेक्नोलॉजी पर नहीं, बल्कि उन लोगों पर भी है जो इसे बनाते हैं और सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं।
सुंदर पिचाई का आज का विचार-
मैं आशावादी हूं, इसलिए नहीं कि मुझे टेक्नोलॉजी पर भरोसा है, बल्कि इसलिए कि मुझे लोगों पर भरोसा है।
सुंदर पिचाई के इस विचार का मतलब है कि फ्यूचर को लेकर उनका भरोसा सिर्फ टेक्नोलॉजी पर नहीं है। मशीनें काम को तेज कर सकती हैं, सॉफ्टवेयर कई चीजों को अपने आप कर सकता है और AI कुछ ही सेकंड में जवाब दे सकता है। लेकिन सही फैसला लेना अभी भी इंसान के हाथ में है। कौन-सी परेशानी हल करनी है, किसी जवाब पर भरोसा करना है या नहीं और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किस तरह करना है, यह इंसान ही तय करता है।
नई टेक्नोलॉजी आने के बाद हर कोई उसे एक ही तरीके से इस्तेमाल नहीं करता। कंपनियां तय करती हैं कि उन्हें कौन-सा सिस्टम अपनाना है, एम्पलॉई देखते हैं कि वह उनके काम को कैसे आसान बना सकता है और कस्टमर तय करते हैं कि कौन-सा प्रोडक्ट लंबे समय तक चलेगा। वहीं गवर्नमेंट और दूसरी ऑर्गेनाइजेशन यह तय करती हैं कि किसी टेक्निक के इस्तेमाल के लिए कौन से नियम होने चाहिए।
टेक्नोलॉजी कई ऐसे काम कर सकती है, जिनमें पहले काफी समय और मेहनत लगती थी। इससे काम करने का तरीका जरूर बदल रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इंसानों की जरूरत खत्म हो जाएगी। किसी को यह तय करना होगा कि काम कैसे किया जाए, नतीजा सही है या नहीं और गलती होने पर क्या कदम उठाना है। बातचीत करना, परेशानी को समझना, सही फैसला लेना और दूसरों के साथ मिलकर काम करना जैसी खूबियां आज भी जरूरी हैं।
टेक्नोलॉजी लगातार बदल रही है, इसलिए एक ही सिस्टम या टूल को हमेशा के लिए सीख लेना काफी नहीं है। आज जो सॉफ्टवेयर काम का है, हो सकता है कुछ समय बाद उसकी जगह कोई नया टूल ले ले। ऐसे में नई चीजों को सीखने और जरूरत के हिसाब से खुद को बदलने की आदत काफी काम आती है। शुरुआत में किसी नई टेक्नोलॉजी को समझने में परेशानी हो सकती है, लेकिन गलतियों से सीखकर धीरे-धीरे बेहतर हुआ जा सकता है।
AI इनफार्मेशन सोच-समझकर अपनाएं
पिचाई की बात का मतलब यह नहीं है कि टेक्नोलॉजी से जुड़ी हर चीज अच्छी ही होगी। AI गलत जानकारी दे सकता है, ऑटोमेशन से कुछ नौकरियों पर असर पड़ सकता है और डिजिटल टेक्नोलॉजी से प्राइवेसी जैसे सवाल भी खड़े हो सकते हैं। इसलिए नई टेक्निक को अपनाते समय सिर्फ उसके फायदे देखना सही नहीं है। यह भी समझना जरूरी है कि इसे किसने बनाया, इसका इस्तेमाल कौन कर रहा है, इससे किसे फायदा हो रहा है और इसकी वजह से किन लोगों को परेशानी हो सकती है।
टेक्नोलॉजी लगातार बदल रही है, इसलिए जरूरी है कि हम भी नई चीजों के साथ खुद को बदलते रहें। हर नई टेक्निक को बिना सोचे अपनाने के बजाय यह समझना बेहतर है कि वह हमारे लिए कितनी काम की है। खुली सोच और सीखने की आदत के साथ हम आने वाले बदलावों को आसानी से अपना सकते हैं।