जीवन में हर रिश्ता प्यार से नहीं, कई बार सिर्फ लगाव से भी जुड़ा होता है। लेकिन दोनों में क्या फर्क है? उन्होंने बताया कि कई बार हम जिसे प्यार समझते हैं, वह असल में डर या अकेलेपन की भावना भी हो सकती है इसके आलावा सद्गुरु ने इसे बेहद आसान शब्दों में समझाया है, जिसे जानना हर किसी के लिए जरूरी हो सकता है:
Space for the Partner (पार्टनर की अपनी आजादी)
सद्गुरु कहते हैं कि सच्चा प्यार किसी को आजादी देता है अपनी मर्जी करने की, जबकि जरूरत से ज्यादा लगाव इंसान को सामने वाले पर डिपेंड बना देता है। इसलिए दोनों के बीच का फर्क समझना बहुत जरूरी है।
Self Happiness (अपनी खुशी)
यदि आपकी खुशी भी सिर्फ किसी एक इंसान पर टिकी है, तो रिश्ता बोझ बन सकता है। पहले खुद के साथ खुश रहना सीखें, फिर रिश्ते भी बेहतर बनेंगे।
हर समय किसी अपने को खोने का डर या उस पर नजर रखना प्यार की निशानी नहीं है। एक अच्छा रिश्ता भरोसे और सम्मान से चलता है, शक और डर से नहीं।
Own Identity (अपनी पहचान)
रिश्ते में होने का मतलब यह नहीं कि आप अपनी पसंद, सपने या पहचान भूल जाएं। जब दोनों लोग अपनी अलग पहचान बनाए रखते हैं, तो रिश्ता और भी ज्यादा ज्यादा मजबूत बनता है।
Inner Strength (खुद को समझें)
सद्गुरु का कहना है कि अगर इंसान अंदर से मजबूत और संतुष्ट होगा, तो वह दुसरो से भी बिना किसी उम्मीद या दबाव के रिश्ता निभा पाएगा। ऐसे रिश्तों में प्यार भी ज्यादा सच्चा होता है।