बच्चों के बड़े होने के साथ उनका बिहेवियर बदलता हुआ दिखाई देता है। वे कभी छोटी-सी बात पर नाराज होकर कमरे में चले जाते हैं, तो कभी माता-पिता की बात सुनने के बजाय चुप रहना पसंद करते हैं। ऐसे समय में बच्चों को हर कदम पर रोकने या उनकी हर जरूरत खुद पूरी करने के बजाय, उन्हें धीरे-धीरे अपनी जिम्मेदारियां संभालने का मौका देना ज्यादा जरूरी है।
बच्चों के लिए माता-पिता का प्यार और चिंता होना आम बात है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सुरक्षा बच्चे को खुद से चीजें समझने नहीं देती है। इसलिए समझदार पैरेंट्स बच्चों के साथ प्यार और भरोसे का सही बैलेंस बनाते हैं, ताकि बच्चा अपनी गलतियों से सीखते हुए आगे बढ़ सके। इसके लिए माता-पिता कुछ आसान टिप्स अपना सकते हैं, जो बच्चों को जिम्मेदार बनाने में मदद करेंगे।
बच्चे की हर जिद पूरी करना प्यार जताने का सही तरीका नहीं है। अगर बच्चा किसी ऐसी चीज की मांग करता है जो जरूरी नहीं है या उसके लिए सही नहीं है, तो माता-पिता को बिना गुस्सा किए साफ तौर पर मना करना चाहिए। सिर्फ ‘नहीं’ कहकर बात खत्म करने के बजाय, छोटी और आसान भाषा में वजह भी समझाएं।
माता-पिता अक्सर बच्चे को परेशानी में देखकर तुरंत उसकी मदद करने लगते हैं, लेकिन हर बार ऐसा करना जरूरी नहीं है। बच्चा कोई छोटी गलती करता है, तो पहले उसे खुद सुधारने का मौका दें। जरूरत पड़ने पर सिर्फ थोड़ी मदद करें। अपनी गलतियों से सीखने वाला बच्चा आगे चलकर मुश्किल सिचुएशन में घबराने के बजाय खुद रास्ता निकालना सीखता है।
हर बच्चा अपनी कैपेसिटी के हिसाब से सीखता है। इसलिए उसे किसी रिश्तेदार, दोस्त या पड़ोसी के बच्चे से बार-बार तुलना करना उसके कॉन्फिडेंस को कम कर सकता है। बच्चा किसी काम में दूसरे से पीछे है, तो उसे ताने देने के बजाय उसकी मेहनत पर ध्यान दें। वह जहां अच्छा कर रहा है, उसकी तारीफ करें और जहां सुधार की जरूरत है, वहां प्यार से समझाएं।
माता-पिता से भी गलती हो सकती है और इसे स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है। अगर कभी बच्चे पर बिना वजह गुस्सा हो गया हो या बात गलत समझ ली हो, तो उससे माफी मांगने से माता-पिता की इज्जत कम नहीं होती। जिससे बच्चा सीखता है कि अपनी गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।
अच्छी परवरिश का मतलब बच्चों को हर परेशानी से बचाना नहीं, बल्कि उन्हें जिंदगी की छोटी-बड़ी चुनौतियों के लिए तैयार करना है। जब माता-पिता प्यार के साथ भरोसा देते हैं, तो बच्चे अपनी जिम्मेदारियां समझना, सही फैसले लेना और खुद पर विश्वास करना सीखते हैं। यही आदतें आगे चलकर उन्हें आत्मनिर्भर इंसान बनाने में मदद करती हैं।