Merry Christmas 2024: आज दुनिया भर में मनाया जा रहा है क्रिसमस का त्योहार, जानें इतिहास और महत्व

Merry Christmas 2024: दुनियाभर में हर साल 25 दिसंबर के दिन क्रिसमस उत्सव मनाया जाता है। क्रिसमस के त्योहार पर प्रभु ईसा मसीह का जन्मदिन प्रेम और सद्भाव के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग केक काटकर क्रिसमस का आनंद उठाते हैं। इसके साथ ही एक दूसरे को गिफ्ट भी देते हैं। क्रिसमस उत्सव का आगाज होने से पहले यहां उसके महत्व और इतिहास के बार में एक नजर डाल सकते हैं

अपडेटेड Dec 25, 2024 पर 7:35 AM
Merry Christmas 2024: ईसाई धर्म में क्रिसमस एक महत्वपूर्ण त्योहार है और इसे बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

ईसा मसीह के जन्म दिन की याद में क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है। यह इसाइयों का सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। यह त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। ईसाई धर्म के लोग इस त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। हर साल की तरह इस बार भी 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन ईसाई लोग केक काटकर एक दूसरे का मुंह मीठा करेंगे। इसके साथ ही एक दूसरे को तोहफे देंगे। इस दिन चर्च को सजाया जाता है। यह दिन ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यही कारण है कि इसे बड़ा दिन कहा जाता है।

क्रिसमस त्योहार में किसमस ट्री का विशेष महत्व है। क्रिसमस ट्री को सदाबहार पेड़ों से बनाया जाता है। इसे रंग-बिरंगी रोशनी और सजावट से सजाया जाता है। यह पेड़ जीवन की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है। क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा का इतिहास काफी पुराना है। कहा जाता है कि इसकी शुरुआत जर्मनी से हुई थी। क्रिसमस ट्री के आसपास परिवार और दोस्त इकट्ठा होते हैं।

क्रिसमस का इतिहास


इतिहास के जानकारों की मानें तो "क्रिसमस" शब्द की उत्पत्ति "क्राइस्ट" शब्द से हुई है। दुनिया में पहली बार क्रिसमस का खास त्योहार रोम में 336 ईस्वी में मनाया गया था। उसके बाद से पूरी दुनिया में यह त्योहार मशहूर हो गया। आज अन्य धर्मों के लोग भी इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं। माना जाता है कि इस दिन जीजस क्रिस्ट यानी यीशु का जन्म हुआ था। जिन्हें भगवान का बेटा कहा जाता है। उनके नाम क्राइस्‍ट से ही क्रिसमस बना है। एक पुरानी कथा के अनुसार, ईसाई धर्म की स्थापना करने वाले यीशु का जन्म क्रिसमस के दिन हुआ था। इसलिए पूरी दुनिया में इस दिन को क्रिसमस-डे कहकर मनाया जाता है।

वहीं एक पुरानी कथा के अनुसार, एक बार ईश्वर ने ग्रैबियल नामक अपना एक दूत मैरी के पास भेजा था। जिसमें भविष्यवाणी हुई कि उन्हें प्रभु के पुत्र यीशु को जन्म देना है। मैरी गर्भवती हुईं और गर्भावस्था के दौरान उन्हें बेतलहम जाना पड़ा। रात होने की वजह से उन्हें वहीं रुकने का सोचा, लेकिन उन्हें वहां रुकने के लिए कोई ठीक जगह नहीं मिली। कुछ समय बाद, उन्हें एक जगह दिखी। जहां पशुपालन करने वाले लोग रहते थे। मैरी ने वहीं रुकने का फैसला किया। अगले दिन मैरी ने उसी जगह पर यीशु को जन्म दिया। यह घटना ईसाई धर्म के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इसे क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है।

क्रिसमस का महत्व

ईसाइयों के लिए, क्रिसमस ईश्वर के पुत्र यीशु मसीह के जन्म का प्रतीक है। वे मानते हैं कि यीशु मसीह दुनिया को पाप से मुक्त करने आए थे। क्रिसमस आशा, प्रेम, और दया का त्योहार है। यह लोगों को एक साथ लाता है और उन्हें एक-दूसरे के प्रति दयालु बनने के लिए प्रेरित करता है। क्रिसमस कई संस्कृतियों में एक महत्वपूर्ण त्योहार बन गया है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह की अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट की सलाह लें।

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