अमेरिकन एयरलाइंस ग्रुप अगले साल की शुरुआत तक अपने इंडिया टेक्नोलॉजी हब में कर्मचारियों की संख्या दोगुनी करके लगभग 800 करने की तैयारी में है। यह बात रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कही गई है। इससे पहले साउथवेस्ट एयरलाइंस ने घोषणा की थी कि वह अगले कुछ सालों में अपने हैदराबाद ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का विस्तार करके कर्मचारियों की संख्या लगभग 1,000 तक करेगी।
रॉयटर्स के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि अमेरिकन एयरलाइंस ने 2024 में अपना हैदराबाद हब शुरू किया था। अभी इसमें लगभग 400 कर्मचारी काम करते हैं और उनका फोकस मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, AI और साइबर सुरक्षा पर है। एयरलाइन का कहना है कि वह कर्मचारियों की भर्ती जारी रखने का इरादा रखती है।
कंपनी के मुताबिक, "फोर्ट वर्थ, फीनिक्स और हैदराबाद की टीमें, बिजनेस के साथ मिलकर काम करती हैं, ताकि प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया जा सके, नए टूल्स लागू किए जा सकें जिनसे बाजार तक पहुंचने की गति और बिजनेस के नतीजे बेहतर हों। एक ज्यादा मजबूत एयरलाइन बनाई जा सके, साथ ही टीम के सदस्यों और ग्राहकों को बेहतर अनुभव दिया जा सके।"
इन अमेरिकी कंपनियों ने भी भारत में बढ़ाए टेक ऑपरेशंस
जेपी मॉर्गन चेस, वॉलमार्ट, मैकडोनल्ड्स, एनवीडिया और एली लिली जैसी वैश्विक कंपनियों ने भी भारत में अपने टेक्नोलॉजी ऑपरेशंस बढ़ाए हैं। ये कंपनियां भारत के टैलेंट का फायदा लेना चाहती हैं क्योंकि अन्य जगहों पर लागत बढ़ रही है और आर्थिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। पहले भारत स्थित हब मुख्य रूप से बैक-ऑफिस यूनिट्स के तौर पर काम करते थे, लेकिन अब ये इंजीनियरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, फाइनेंस और ऑपरेशंस जैसे मुख्य कार्यों को भी संभालते हैं।
2026 की Nasscom-Zinnov रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे बड़े GCC हब के रूप में उभरा है। 2,100 से ज्यादा सेंटर्स में लगभग 23.6 लाख लोग काम करते हैं और इनसे लगभग 100 अरब डॉलर का रेवेन्यू हासिल होता है। अमेरिकन एयरलाइंस का यह भी कहना है कि साल 2021 के बाद से हर साल एयरलाइन ने अपने IT निवेश और अमेरिका स्थित टेक्नोलॉजी कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी की है।