भारत की सबसे बड़ी पेंट कंपनी Asian Paints महंगाई बढ़ने पर कीमतों में और बढ़ोतरी के लिए तैयार है। यह कहना है कंपनी के CEO अमित सिंगले (Amit Syngle) का। कंपनी ने आज 17 जुलाई को FY25 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। अप्रैल-जून तिमाही के दौरान कंपनी का प्रदर्शन बाजार के अनुमान से कमजोर रहा। सिंगले ने एशियन पेंट्स की अर्निंग कॉल में कहा, "फर्म के लिए एक चिंता महंगाई है और हमने इसके जवाब में पहले ही प्राइस हाइक कर ली है। हम आगामी तिमाही में 1.5 फीसदी की मुद्रास्फीति की आशंका कर रहे हैं और नतीजतन हमें आगे भी कीमत में बढ़ोतरी करनी होगी।"
Asian Paints के CEO ने क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा, हमारे पियर्स की तुलना में हमें लगता है कि प्राइस इलास्टिसिटी को देखते हुए हमारा प्राइसिंग प्रीमियम पर है। हमारे मूल्य निर्धारण के निर्णय हमारे मार्जिन पर आधारित होते हैं, और एशियन पेंट्स इसे प्रतिस्पर्धा पर आधारित नहीं करता है। सिंगले ने कहा, "जब हम मूल्य वृद्धि लागू करेंगे, तो हम वैल्यू और वॉल्यूम ग्रोथ के बीच अंतर को लगभग 5 से 6 फीसदी के आसपास देखेंगे।" आगामी तिमाही के लिए वॉल्यूम ग्रोथ डबल डिजिट में होने की संभावना है।
Asian Paints का नेट प्रॉफिट 25% घटा
Asian Paints ने अप्रैल-जून तिमाही में 1170 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही के 1550 करोड़ रुपये से 25 फीसदी कम है। इस दौरान कंपनी के मुनाफे में उम्मीद से ज्यादा की गिरावट देखी गई। कंपनी ने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में उसका रेवेन्यू दो फीसदी से ज्यादा घटकर 8970 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक साल पहले यह 9154 करोड़ रुपये था। भारत की सबसे बड़ी पेंट्स कंपनी ने पुष्टि की है कि उसने अपने पोर्टफोलियो में लगभग एक फीसदी की कीमत वृद्धि की है, जो 22 जुलाई से लागू होगी।
Asian Paints पर ब्रोकरेज की राय
घरेलू ब्रोकरेज नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि इससे ब्रांड निवेश में वृद्धि की गुंजाइश भी मिलेगी, खासकर बिरला ओपस जैसी नई कंपनियों के साथ। नुवामा ने कहा, "हमें उम्मीद है कि अन्य कंपनियां भी इसी तरह आगे बढ़ेंगी। मौजूदा कंपनियों के लिए A&P खर्च में मामूली वृद्धि करके और मार्जिन को हेल्दी रेंज में रखकर बिरला ओपस से मुकाबला करने के लिए यह एक सकारात्मक कदम है। इससे यह भी पता चलता है कि पेंट इंडस्ट्री की प्राइसिंग पावर एक प्रमुख कंपनी बिड़ला ओपस की एंट्री के बाद भी बरकरार है।" ब्रोकरेज ने कहा, "इसके अलावा, बाजार का एक अहम हिस्सा (30 फीसदी) अन-ऑर्गेनाइज्ड बना हुआ है, जिससे बड़ी कंपनियों के लिए बहुत बड़ी गुंजाइश है।"