Crude Oil News: फिर $100 के पार जाएगा कच्चा तेल? इन बातों से तय होगी चाल

Crude Oil News: नीचे की तरफ फिसलते-फिसलते कच्चे तेल ने रिवर्स गियर लगाया और पश्चिमी एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने पर उबल पड़ा। प्रति बैरल ब्रेंट क्रूड उछलकर फिर $85 के करीब पहुंच गया। मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक यह फिर $100 के पार जा सकता है। जानिए कच्चे तेल की चाल किन बातों से तय होगी और अमेरिका-ईरान वार से गल्फ देशों की स्ट्रैटेजी में कितना बदलाव होगा

अपडेटेड Jul 15, 2026 पर 12:08 PM
Crude Oil News: मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी रहती है या इसकी आंच ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचती है तो कच्चे तेल के भाव एक बार फिर से प्रति बैरल $100 से ऊपर जा सकती है और मार्च-अप्रैल के लेवल पर फिर पहुंच सकती है। (File Photo- Pexels)

Crude Oil News: कच्चे तेल में एक बार फिर उबाल आ रहा है। एमएसटी मार्की (MST Marquee) के एनर्जी रिसर्च हेड सॉल कावोनिक (Saul Kavonic) का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नई दिक्कतों ने वैश्विक ऑयल मार्केट की तस्वीर बदल दी और सप्लाई से जुड़ा रिस्क फिर से बढ़ने के चलते इसकी कीमतें हाई लेवल पर बनी रह सकती है। सॉल का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी रहती है या इसकी आंच ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचती है तो कच्चे तेल के भाव एक बार फिर से प्रति बैरल $100 से ऊपर जा सकती है और मार्च-अप्रैल के लेवल पर फिर पहुंच सकती है।

इन बातों से तय होगी कच्चे तेल की चाल

सॉल का कहना है कि नियर टर्म में तेल की कीमतें किस तरफ बढ़ेगी, यह इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई किस तरह आगे बढ़ती है। अगर तनाव हल्का होता है, तो हाल में कच्चे तेल की कीमतों में आई करीब 10% की बढ़ोतरी घट सकती है लेकिन अगर लड़ाई लंबी खिंचती है या एनर्जी इंफ्रा पर हमले होते हैं, तो कीमतें तेजी से बढ़ सकती है। पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई एक बार शुरू होने पर ब्रेंट क्रूड उबल पड़ा और प्रति बैरल $85 के करीब पहुंच गया। इससे पहले सीजफायर की उम्मीदों और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की संभावना के चलते तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद की जा रही थी।


होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही फिर से सामान्य होने की उम्मीद पर माना जा रहा था कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई होगी तो सप्लाई सरप्लस हो जाएगी लेकिन पश्चिमी एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ा तो माहौल बदल गया। इस रास्ते से गुजरने वाला तेल अब युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में सिर्फ 15% ही रह गया है। मार्केट में सप्लाई की कमी बनी हुई है और मांग पूरी करने के लिए इन्वेंट्री पर निर्भरता बनी हुई है। सॉल का कहना है कि तेल की कीमतों में तब तक कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है, जब तक कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग युद्ध से पहले के लेवल से लगभग 30-50% तक वापस नहीं आ जाता जिससे ज़्यादा कच्चा तेल इंटरनेशनल मार्केट तक पहुँच सके।

Iran-US War से कितनी बदल पाएगी स्ट्रैटेजी?

सॉल का अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खाड़ी देशों में एनर्जी सिक्योरिटीज से जुड़ी रणनीतियों को हमेशा के लिए बदल देगा। उन्होंने कहा कि तेल निकालने वाले देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एक्सपोर्ट के वैकल्पिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा सकते हैं। हालांकि यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों ने पहले ही ऐसी पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना का ऐलान किया जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरती लेकिन सॉल के मुताबिक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में कई साल लगेंगे। इराक और कुवैत जैसे देशों के लिए एक्सपोर्ट रूट के मामले में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत होगी, यानी कि आने वाले समय में भी होर्मुज स्ट्रेट के एक अहम ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट बने रहने की उम्मीद है।

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