अशनीर ग्रोवर नहीं रहेंगे BharatPe की शेयरहोल्डिंग का हिस्सा, दोनों पार्टीज ने आपस में सुलटाया विवाद

अशनीर ग्रोवर को मार्च 2022 में कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने BharatPe के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद से हटा दिया था। तब से, दोनों पक्ष लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। ग्रोवर का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि भारतपे अपने सभी स्टेकहोल्डर्स के फायदे के लिए आगे बढ़ती रहेगी और सफल होती रहेगी

अपडेटेड Sep 30, 2024 पर 11:18 AM
दोनों पक्षों ने दायर मामलों को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।

फिनटेक फर्म भारतपे (BharatPe) और इसके पूर्व को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) के बीच वर्षों से चली आ रही कानूनी लड़ाई और सार्वजनिक विवाद खत्म हो गए हैं। दोनों पक्ष एक सेटलमेंट पर पहुंच गए हैं। भारतपे के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि समझौते के तहत ग्रोवर किसी भी क्षमता में भारतपे से जुड़े नहीं रहेंगे और न ही कंपनी की शेयरहोल्डिंग का हिस्सा होंगे। इसके अलावा, ग्रोवर के कुछ शेयर कंपनी के फायदे के लिए रेसिलिएंट ग्रोथ ट्रस्ट को ट्रांसफर किए जाएंगे और उनके बाकी शेयरों का मैनेजमेंट उनकी पारिवारिक ट्रस्ट करेगी।

दोनों पक्षों ने दायर मामलों को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। कंपनी के एक करीबी सूत्र ने कहा कि ग्रोवर अपनी हिस्सेदारी का 1.4% हिस्सा भारतपे बोर्ड को ट्रांसफर करेंगे। बाकी 3.5-3.7% हिस्सा पारिवारिक ट्रस्ट को जाएगा, जिससे वह कंपनी की कैप टेबल से बाहर रहेंगे। इसके अलावा, वह भारतपे के को-फाउंडर भाविक कोलाडिया को भी शेयर लौटाएंगे। जनवरी 2023 में, कोलाडिया ने आरोप लगाया था कि उन्होंने भारतपे के 1,611 शेयर (अब 16,110 शेयर) ग्रोवर को ट्रांसफर किए, जिनकी कीमत 88 लाख रुपये थी। लेकिन उन्हें कभी भी इनका भुगतान नहीं किया गया। बाद में मामला अदालत में चला गया और ग्रोवर को इन शेयरों को बेचने से रोक दिया गया।

ग्रोवर ने भारतपे के मैनेजमेंट पर जताया भरोसा


30 सितंबर, 2024 को भारतपे की ओर से जारी बयान में कहा गया, "हम ग्रोवर को शुभकामनाएं देते हैं। भारतपे अपने मर्चेंट और ग्राहकों को इंडस्ट्री-लीडिंग सॉल्यूशंस डिलीवर करने पर फोकस करना जारी रखे हुए है, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी के साथ विकास हो रहा है।"

इस घटनाक्रम के बाद ग्रोवर ने ट्वीट किया, "मैं भारतपे के साथ निर्णायक समझौते पर पहुंच गया हूं। मैं मैनेजमेंट और बोर्ड पर भरोसा करता हूं, जो भारतपे को सही दिशा में आगे ले जाने में शानदार काम कर रहे हैं। मैं कंपनी की ग्रोथ और सफलता के साथ जुड़ा हुआ हूं। मैं अब किसी भी क्षमता में भारतपे से जुड़ा नहीं रहूंगा, न ही कैपिटल टेबल का हिस्सा रहूंगा। मेरे बाकी शेयरों का मैनेजमेंट मेरी पारिवारिक ट्रस्ट करेगी। दोनों पक्षों ने दायर मामलों को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। मुझे उम्मीद है कि भारतपे अपने सभी स्टेकहोल्डर्स के फायदे के लिए आगे बढ़ती रहेगी और सफल होती रहेगी।"

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