Tata Electronics iPhone Plant: तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बंद की जांच, भूजल दूषित होने का था मामला

Tata Electronics iPhone Plant: दरअसल प्लांट के पास खेती करने वाले लोगों ने महीनों तक तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत की कि फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी उनकी जमीन और खुले कुओं को दूषित कर रहा है

अपडेटेड Jun 17, 2026 पर 8:40 AM
नोटिस में रेगुलेटर ने चेतावनी दी थी कि अगर Tata Electronics ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो फैक्ट्री को जबरन बंद कर दिया जाएगा।

तमिलनाडु के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के iPhone पार्ट्स बनाने वाले प्लांट की जांच बंद कर दी है। इसकी वजह है कि कंपनी ने प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं का समाधान कर दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने एक बयान में कहा है कि तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पुष्टि की है कि कंपनी ने वॉर्निंग नोटिस में पूछे गए सभी सवालों का संतोषजनक ढंग से जवाब दिया है और इस मामले पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

टाटा ग्रुप की Tata Electronics ताइवान की फॉक्सकॉन के बाद दक्षिण एशिया में एपल की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर है। तमिलनाडु के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आरोप था कि कंपनी के होसुर iPhone प्लांट से निकले गंदे पानी ने आस-पास के खेतों के भू-जल (ग्राउंडवॉटर) को दूषित कर दिया है। नोटिस में रेगुलेटर ने चेतावनी दी थी कि अगर टाटा ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो फैक्ट्री को जबरन बंद कर दिया जाएगा। इस प्लांट में iPhone के लिए बैक पैनल और दूसरे पार्ट्स बनाए जाते हैं।

कंपनी का कहना है कि प्रदूषण बोर्ड ने पुष्टि की है कि होसुर, तमिलनाडु में Tata Electronics की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से हाल ही में लिए गए पानी के नमूनों के विश्लेषण की रिपोर्ट में किसी भी तरह के प्रदूषण का संकेत नहीं मिला है।


कैसे शुरू हुआ पूरा मामला

दरअसल प्लांट के पास खेती करने वाले लोगों ने महीनों तक तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत की कि फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी उनकी जमीन और खुले कुओं को दूषित कर रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, 25 मई 2026 के रेगुलेटरी नोटिस में कहा गया कि इन शिकायतों के बाद दिसंबर 2025 और मई 2026 के बीच राज्य की ओर से 5 बार निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपनी फैसिलिटी के अंदर बने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग तालाब में गंदा पानी छोड़ा था। तालाब के ओवरफ्लो होने से आस-पास की कृषि भूमि में स्थित खुले कुओं का भू-जल दूषित हो गया।

तीन पेज के नोटिस में कहा गया कि प्रदूषण बोर्ड ने 23 दिसंबर, 2025 को भी एक लेटर जारी किया था। इसमें दिए गए निर्देशों पर कंपनी ने कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की। मई के नोटिस में प्रदूषण बोर्ड ने Tata Electronics से पूछा था कि नियमों के कथित उल्लंघन के लिए यूनिट की बिजली क्यों न काटी जाए और यूनिट को क्यों न बंद किया जाए।

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Tata Electronics ने कराई थी जांच

इस मामले पर Tata Electronics ने कहा था कि उसने एक मान्यता प्राप्त लैब के माध्यम से स्वतंत्र विश्लेषण करवाया था। स्टडी में पाया गया कि कंपनी सभी रेगुलेटरी नियमों का पूरी तरह से पालन कर रही है। कंपनी ने उन नतीजों के साथ प्रदूषण प्राधिकरण को औपचारिक जवाब सौंपा। कंपनी के मुताबिक, वह जिम्मेदार बिजनेस प्रैक्टिसेज और पर्यावरण व स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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