Budget 2022: LIC के IPO में 10% की जगह सिर्फ 5% हिस्सा बेचेगी सरकार? FY23 के विनिवेश टारगेट से उठे सवाल

बजट 2022: सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में सरकारी कंपनियों में विनिवेश के जरिए 65,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल के 1.75 लाख करोड़ के विनिवेश लक्ष्य से बहुत ही कम है

अपडेटेड Feb 01, 2022 पर 6:41 PM
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया

Budget 2022: अधिकतर बजट को जब तक डिटेल में न पढ़ा जाए, तब तक उसकी सबसे अहम बात समझ में नहीं आती है। अगर सरकार के विनिवेश लक्ष्य की बात हो रही हो, तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। बजट के डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में सरकारी कंपनियों में विनिवेश के जरिए 65,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। यह मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 के लिए रखे गए 1.75 लाख करोड़ के विनिवेश लक्ष्य से बहुत ही कम है।

बजट पेश होने के पहले तक अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए विनिवेश लक्ष्य को 1.2 से 1.5 लाख करोड़ के बीच में रख सकती है। हालांकि सरकार ने सभी अनुमानों से बिल्कुल उलट अपना लक्ष्य काफी कम रखा है। इसकी उम्मीद तभी हो गई थी, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में विनिवेश लक्ष्य का जिक्र नहीं मिला। यह संकेत था सरकार का विनिवेश लक्ष्य इस बार उम्मीद से कम रह सकता है।

हालांकि इस विनिवेश के इस उम्मीदों से कम लक्ष्य ने कई अर्थशास्त्रियों और मार्केट के जानकारों को लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) के आईपीओ को लेकर चिंता में डाल दिया है। वे यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर इस लक्ष्य में सरकार ने एलआईसी के विनिवेश से मिलने वाली रकम को रखा है या नहीं।


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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि एलआईसी के आईपीओ के इसी वित्त वर्ष में आने की पूरी संभावना है। हालांकि विनिवेश लक्ष्य को देखकर एक्सपर्ट यह सोच में पड़ गए हैं, सरकार इस इश्यू के जरिए कितना रकम जुटाना चाहती है। बजट में सरकार की तरफ से रखे गए आंकड़ों पर अगर गौर करें, तो LIC को लेकर तीन स्थितियां बनती है, जो सरकार के विनिवेश लक्ष्य पर असर डालेगी। आइए जानते हैं तीनों तरीकों को-

1. दो-पार्ट में लॉन्च करने की थ्योरी

पिछले साल अगस्त में ऐसी मीडिया रिपोर्टें आई थीं कि सरकार सरकार LIC के पूरे इश्यू को दो भागों में विभाजित कर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसी चिंताए थी कि भारतीय कैपिटल मार्केट के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ का साइज शायद बाजार के संभालने के लिहाज से थोड़ा अधिक हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह संभव है कि सरकार आईपीओ के पहले चरण से करीब 54,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य बना रही हो। यह संभावना इसलिए भी बनती है क्योंकि सरकार ने इस वित्त वर्ष में अभी तक विनिवेश के जरिए करीब 24,000 करोड़ जुटाए हैं और उसने इस पूरे वित्त वर्ष के लिए अपने संसोधित अनुमान को घटाकर 78,000 करोड़ रुपये आंका है।

2. महत्वकांक्षाओं में लाई कमी

पिछले महीने ब्लूबर्ग ने एक रिपोर्ट में बताया था कि सरकार एलआईसी के 203 अरब डॉलर (15 लाख करोड़) का वैल्यूएशन चाहती है। इस वैल्यूएशन पर सरकार 5 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री से 75,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है। हालांकि सरकार को अपने अनुमानित लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिर्फ 54,000 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसका मतलब है कि सरकार अगर एलआईसी के 10,2 लाख करोड़ के वैल्यूएशन पर ही इस लक्ष्य को हासिल कर सकती है।

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अगर सरकार इस वैल्यूएशन पर एक बार में एलआईसी का आईपीओ लाती है, तो इसका मतलब यही होगा कि सरकार ने वैल्यूएशन के मोर्च पर अपनी महत्वकांक्षा को नरम किया है। वैसे एनालिस्ट्स मोटे तौर पर एलआईसी की वैल्यूएशन करीब 160 अरब डॉलर (12 लाख करोड़) होने का अनुमान जता रहे हैं।

3. यथार्थवादी लक्ष्य

एक तीसरी संभावना यह बनती है कि सरकार ने इस बार यथार्थवादी बजट पेश करने का लक्ष्य रखा हो। साल 2021-22 में खर्च और आय के अनुमानों को देखते हुए सरकार ने इस बार टैक्स और दूसरे स्रोतों से हासिल होने वाली आय में कोई बहुत बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं की है। यह संभव है कि सरकार ने इसी तर्ज पर विनिवेश लक्ष्य को भी सेट किया हो। वित्त मंत्री ने बजट के प्रेस-कॉन्फ्रेंस में कहा भी था कि, "मुझे लगता है कि हम इस बार बहुत यथार्थवादी हैं।"

बता दें कि एलआईसी के बाद भारत पेट्रोलियम, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, तीन जनरल बीमा कंपनियां और दो सरकारी बैंकों के लिए खरीदार तलाशने की प्रक्रिया में है।

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