इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने पर नए ग्राहकों को बजट में इंसेटिंव संभव

पहली बार इंश्योरेंश खरीदने वालों को अलग से इंसेटिंव मिल सकता है। सीएनबीसी-आवाज को सूत्रों के मिली जानकारी के मुताबिक बजट में सरकार टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस को बढ़ावा देने के लिए बड़े एलान कर सकती है। बजट में इंश्योरेंस प्रीमीयम पर इनकम टैक्स की धारा 80 सी के अलावा भी छूट दी जा सकती है। टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्रालय इंडस्ट्री के सुझावों पर विचार कर रहा है

अपडेटेड Dec 27, 2022 पर 2:21 PM
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इंडस्ट्री ने इंश्योरेंश को बढ़ावा और पहुंच बढ़ाने के लिए ऐसा करने का विचार हो रहा है।

पहली बार इंश्योरेंस खरीदने वालों को अलग से इंसेटिंव मिल सकता है। सीएनबीसी-आवाज को सूत्रों के मिली जानकारी के मुताबिक बजट में सरकार टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस को बढ़ावा देने के लिए बड़े एलान कर सकती है। बजट में इंश्योरेंस प्रीमीयम पर इनकम टैक्स की धारा 80 सी के अलावा भी छूट दी जा सकती है। टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्रालय इंडस्ट्री के सुझावों पर विचार कर रहा है। इनमें महिलाओं को विशेष छूट देने की मांग की गई है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इंश्योरेंस बजट में महिला ग्राहकों को प्रीमीयम पर अतिरिक्त टैक्स छूट मिल सकता है। पहले प्रीमीयम को महिलाओं के लिए माफ भी किया जा सकता है । इनकम टैक्स की धारा 80C के अलावा इंश्योरेंस प्रीमीयम पर इंसेंटिव की बातचीत जारी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इंडस्ट्री ने इंश्योरेंश को बढ़ावा और पहुंच बढ़ाने के लिए ऐसा करने का विचार हो रहा है। इंश्योरेंस पर इंसेंटिव के लिए सेक्शन 80C से अलग नया सेक्शन बन सकता है। साथ ही वित्त मंत्रालय इंश्योरेंस इंडस्ट्री के दिए सुझावों पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इंश्योरेंस प्रीमीयम पर GST दरों को भी तर्कसंगत बनाने की भी मांग है।


सेक्शन 80C क्या होता है

इनकम टैक्स एक्ट का Section 80 C, आपको हर साल 1.50 लाख रुपए तक की आमदनी पर टैक्स बचाने की सुविधा देता है। सेक्शन 80c इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत, टैक्स छूट संबंधी एक नियम है। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति हर साल 1.5 लाख रुपए तक के निवेश (investments) और खर्चो (Expenses) पर टैक्स छूट ले सकता है। ये टैक्स छूट आपको tax deduction (टैक्स कटौती) के रूप में मिलती है यानी कि आप अपनी कुल वार्षिक आमदनी में से 1.50 लाख रुपए की आमदनी को काटकर बाहर कर सकते हैं। बाकी की आमदनी पर इनका टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स की गणना करनी होगी।

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