एक्सपोर्ट सेक्टर ने बजट में सरकार से ब्याज दरों में राहत देने के मांग की है। प्री-बजट मीटिंग में आज Service और Trade इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री से मुलाकात की। उन्होंने consumer durables और रियल एस्टेट सेक्टर में डिमांड बढ़ाने के लिये टैक्स दरों छूट देने की भी मांग की।
खबर पर विस्तार से बातचीत करते हुए सीएनबीसी-आवाज के संवाददाता आलोक प्रियदर्शी ने कहा कि आज की बैठक में अहम मुद्दा ब्याज में बढ़ोतरी को लेकर रही। जिसे लेकर कंपनियां परेशान है। एक्सपोर्टर की वित्त मंत्री से मांग है कि अग्रेसिव मार्केटिंग के लिए Export development fund का गठन किया जाए। पिछ्ले साल के एक्सपोर्ट का 0.5% के Corpus का fund बनाने की मांग है। ओवरसीज मार्केटिंग में Exporter के खर्च का 200% तक tax deduction दिया जाए।
वहीं Service और Trade इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री से कहा है कि Container manufacturing के तर्ज़ पर Shipping line में भी भारत आत्मनिर्भर बने। सरकार को एक ग्लोबल standered का Indian Shipping line के डेवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए। ताकि हर साल Shipping पर खर्च होने वाले $150-200 बिलियन के खर्च में कटौती की जा सके।
इसके साथ ही ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी से MSMEs परेशान है इसलिए 5% तक Interest Equilization benefits को फिर से बहाल करने की मांग कर रहे है। सर्विस और ट्रेड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों की मांग है कि सरकार Export में रोजगार पैदा करने वाले units को और आर्थिक मदद करे। Consumer durables और रियल एस्टेट में demand बढ़ाने के लिए टैक्स छूट की मांग की है।
इस बीच रियल एस्टेट सेक्टर को इस बजट से बहुत उम्मीदें हैं। Keystone Realtors के सीएमडी बोमन रुस्तम ईरानी ने कहा कि जीएसटी में छूट, होम लोन दरों में राहत सहित रियल्टी सेक्टर की डिमांड सरकार के सामने रखेंगे। उनका कहना है कि खरीदारों को होम लोन दरों में राहत मिलनी चाहिए। पहला या दूसरा घर खरीदारों को टैक्स में सहूलियतें मिलना चाहिए। उनका कहना है कि CREDAI के जरिए डिमांड सरकार के सामने रखेंगे।