Budget 2023 : आम बजट में नई कंपनियों के निजीकरण की उम्मीद कम, लगातार चौथे साल विनिवेश लक्ष्य से चूकेगी सरकार

सरकार ने सरकारी कंपनियों के विनिवेश का जो लक्ष्य रखा था वह अब तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में इस बार के बजट में नई कंपनियों को जोड़े जाने की संभावना ना के बराबर है। अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में उल्लिखित विनिवेश लक्ष्य को कम किया जा सकता है और इसे वास्तविकता के और करीब किए जाने की उम्मीद है

अपडेटेड Jan 29, 2023 पर 7:26 PM
इस साल के बजट में नई कंपनियों के निजीकरण को लेकर उम्मीद काफी कम है।

Budget 2023 : इस साल के बजट में नई कंपनियों के निजीकरण को लेकर उम्मीद काफी कम है। सरकार ने सरकारी कंपनियों के विनिवेश का जो लक्ष्य रखा था वह अब तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में इस बार के बजट में नई कंपनियों को जोड़े जाने की संभावना ना के बराबर है। इसके अलावा,  अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में उल्लिखित विनिवेश लक्ष्य को कम किया जा सकता है और इसे वास्तविकता के और करीब किए जाने की उम्मीद है। बता दें कि मौजूदा वित्त वर्ष लगातार चौथा साल रहने वाला है जब सरकार अपने विनिवेश लक्ष्य से चूकेगी।

विनिवेश से 31,106 करोड़ रुपये जुटा पाई सरकार

मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश से 65,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन पब्लिक सेक्टर की कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर सरकार ने केवल 31,106 करोड़ रुपये जुटाए हैं। सरकार ने 2021 में घाटे में चल रही एयर इंडिया का निजीकरण सफलता के साथ पूरा किया था लेकिन पिछले साल के दौरान पब्लिक सेक्टर कंपनियों के निजीकरण के मोर्चे पर प्रगति अच्छी नहीं रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2024 में होने वाले आम चुनाव के मद्देनजर किसी बड़े विनिवेश की घोषणा की उम्मीद इस बजट में नहीं है।


क्या है सरकार का प्लान

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘योजना उन कंपनियों की रणनीतिक बिक्री को आगे बढ़ाने की है जिनके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है।'' इसका आशय यह है कि सरकार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, एनएमडीसी स्टील लिमिटेड, बीईएमएल, एचएलएल लाइफकेयर, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और आरआईएनएल या विजाग स्टील जैसी कंपनियों के साथ-साथ आईडीबीआई बैंक के निजीकरण को आगे बढ़ाएगी। यह देखते हुए कि रणनीतिक बिक्री या निजीकरण में कम से कम एक साल का समय लगता है, बजट में ऊंचा विनिवेश लक्ष्य तय कर उसे हासिल करना मुश्किल होता है।

नांगिया एंडरसन एलएलपी के भागीदार- सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र परामर्श सूरज नांगिया ने कहा, ‘‘निजीकरण की प्रक्रिया में अक्सर समय लगता है, जो निजीकरण के प्रकार और आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक बातों पर निर्भर करता है। इसके लिए एक मध्यम अवधि की योजना, एक ठोस नियामकीय रूपरेखा और प्रतिस्पर्धी बाजार की जरूरत होती है।'' पईवाई इंडिया के एसोसिएट पार्टनर कर एवं आर्थिक नीति समूह रजनीश गुप्ता ने कहा कि निजीकरण कार्यक्रम में 2024 के आम चुनावों के बाद तेजी देखी जा सकती है।

 

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