महंगाई की मार! त्योहारों से पहले डिटर्जेंट से लेकर पेंट तक के बढ़ सकते हैं दाम; कंपनियां कर रहीं तैयारी

भारत में त्योहारों का सीजन आमतौर पर अगस्त से नवंबर तक चलता है। इस दौरान कंज्यूमर खर्च भी आमतौर पर बढ़ जाता है, खासकर दिवाली के समय। कई कंपनियों की सालाना बिक्री में से लगभग एक तिहाई बिक्री इसी त्योहारी सीजन में होती है

अपडेटेड Aug 01, 2026 पर 12:05 PM
इस साल जून में देश में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई।

भारत की बड़ी कंज्यूमर कंपनियां त्योहारों के मौसम से पहले और लगातार दूसरी तिमाही में प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। हो सकता है कि डिटर्जेंट से लेकर टायर और पेंट तक और महंगे हो जाएं। मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे माल की लागत बढ़ रही है। ऐसे में महंगाई के ऊंचे स्तर पर बने रहने का खतरा है। कंपनियां होम अप्लायंसेज से लेकर किचन की जरूरी चीजों तक हर चीज की कीमतों में बढ़ोतरी के दूसरे दौर की योजना बना रही हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड आने वाली तिमाही में डिटर्जेंट और डिशवॉशिंग बार जैसी कैटेगरी में कीमतों में नपी-तुली बढ़ोतरी करने वाली है। इसके अलावा डोडला डेयरी लिमिटेड और एशियन पेंट्स लिमिटेड समेत कम से कम 7 और कंपनियां भी कीमतें बढ़ाने की सोच रही हैं।

जून 2026 में कितनी रही खुदरा महंगाई


इस साल जून में देश में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई। मई महीने में यह 3.93 प्रतिशत थी। खाने पीने की चीजों की खुदरा महंगाई 5.32 प्रतिशत रही, जबकि मई में 4.78 प्रतिशत थी। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है क्योंकि कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं। कम मॉनसून के कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतें और बढ़ने का खतरा है। ईरान युद्ध के कारण एनर्जी कॉस्ट लगातार ऊंची बनी हुई है। इसका मतलब है कि जल्द ही कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

भारत में त्योहारों का सीजन आमतौर पर अगस्त से नवंबर तक चलता है। इस दौरान कंज्यूमर खर्च भी आमतौर पर बढ़ जाता है, खासकर दिवाली के समय। कई कंपनियों की सालाना बिक्री में से लगभग एक तिहाई बिक्री इसी त्योहारी सीजन में होती है।

प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी न केवल भारत में खपत की मांग की मजबूती की परीक्षा लेगी, बल्कि पॉलिसी मेकर्स की भी परीक्षा लेगी क्योंकि वे महंगाई के दबाव पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। RBI ने कहा है कि वह तभी कोई कदम उठाएगा जब महंगाई का दबाव और गहरा हो जाएगा। भारत के वित्त मंत्रालय ने हाल ही में चेतावनी दी कि महंगाई का असर अब खाने-पीने की चीजों से आगे भी फैल रहा है। ग्लोबल स्तर पर ईंधन की बढ़ती कीमतें और खराब मौसम का असर कई तरह के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की कीमतों पर पड़ रहा है।

RBI की मीटिंग के फैसले 5 अगस्त को

RBI की मौद्रिक नीति समिति ने इस साल जून की बैठक में रेपो रेट में लगातार तीसरी बार कोई बदलाव न करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर स्थिर छोड़ दिया। उम्मीद है कि 3-5 अगस्त को होने वाली अगली मीटिंग में भी ऐसा ही किया जाएगा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आगे का रास्ता इस बात पर निर्भर करेगा कि भूराजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं या नहीं। साथ ही इस पर भी नजर रहेगी कि मॉनसून से गर्मियों की फसल को नुकसान होता है या नहीं।

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