Budget 2023: दिल्ली में एक व्यक्ति आज एक लीटर दूध की थैली के लिए 2022 की शुरुआत के मुकाबले कम से कम 8 रुपये ज्यादा चुकाता है। इसकी वजह Amul और Mother Dairy की तरफ से कई बार अपने दूध के दाम बढ़ाना है। Parle G बिस्कुट के सबसे छोटे पैक की कीमत अब भी 5 रुपये है, लेकिन इस पैकेट का वजन घट गया है। बिस्कुट बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों की कीमतें बढ़ने की वजह से कंपनी ने पैकेट का वजट घटाया है। आटा की कीमत करीब 20 फीसदी बढ़ चुकी है। डिटर्जेंट ब्रांड सर्फ एक्सेल की कीमत भी 8-10 फीसदी बढ़ चुकी है। 2022 में FMCG कंपनियों को डबल चैलेंज का सामना करना पड़ा है। एक तरह ग्रामीण इलाकों में मांग कमजोर बनी हुई है तो दूसरी तरफ इनफ्लेशन ने उनकी मुश्किल बढ़ाई है। इनफ्लेशन की वजह से गावों में लोगों के खर्च करने की क्षमता में कमी आई है। उन्होंने अपनी खपत घटाई या वे सस्ते ब्रांड्स खरीद रहे हैं। रूस-यूक्रेन में लड़ाई की वजह से कमोडिटी की कीमतों में उछाल आया है। इससे कंपनियों के प्रोडक्ट्स की कॉस्ट बढ़ गई है। एफएमसीजी कंपनियों ने बढ़ी कॉस्ट का बोझ ग्राहकों पर डाला है।
एफएमसीजी कंपनियों के लिए अहम है रूरल डिमांड
हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) की रिपोर्ट के मुताबिक, हर तीन में से सिर्फ एक उपभोक्ता शहर में रहता है। हालांकि, शहरी उपभोक्ताओं की प्रति व्यक्ति आय 82 डॉलर है, जबकि ग्रामीण इलाके के उपभोक्ता की आय 27 डॉलर है। इससे साफ है कि ज्यादा कमाई वाले उपभोक्ता शहरों में रहते हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में होने वाली कुल बिक्री एफएमसीजी कंपनियों के लिए बहुत मायने रखती है। ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति आय शहरों के मुकाबले बहुत कम है, जिसका मतलब यह है कि भविष्य में वहां कंपनियों के लिए बड़े मौके हैं।
इसलिए चारा की कीमतें बढ़ने का असर दूध उत्पादकों पर पड़ा है। आटा की कीमतें बढ़ने का असर बिस्कुट बनाने वाली कंपनियों पर पड़ा है। इससे एफएमसीजी कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर हुई हैं। कीमतें बढ़ाने से कंपनियों का रेवेन्यू बढ़ा है, लेकिन ग्राहकों ने खर्च घटाना शुरू कर दिया है। वे गैर-ब्रांडेड प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं। खासकर पर्सनल और होम केयर कैटेगरी में ऐसा देखा जा रहा है।
क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, एफएमसीजी इंडस्ट्री का सालाना टर्नओवर 4.7 लाख करोड़ रुपये है। इसमें फूड और बेवरेज की करीब आधी हिस्सेदारी है। इन दोनों कैटेगरी की ग्रोथ फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में 8-10 फीसदी रहने की उम्मीद है। इसके मुकाबले पर्सनल केयर और होम केयर सेगमेंट की ग्रोथ 6-8 फीसदी रहने का अनुमान है।
कुल मिलाकर इस फाइनेंशियल ईयर में एफएमसीजी कंपनियों का रेवेन्यू 7-9 फीसदी बढ़ने का अनु्मान है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर में 8.5 फीसदी था। इसकी वजह कीमतों में इजाफा को माना जा रहा है। वॉल्यूम ग्रोथ पिछले वित्त वर्ष के 2.5 फीसदी के मुकाबले इस फाइनेंशियल ईयर में सिर्फ 1-2 फीसदी रहने का अनुमान है।
क्रिसिल ने कहा है कि फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में एफएमसीजी की ग्रोथ में वॉल्यूम का बड़ा हाथ होगा, क्योंकि इनफ्लेशन में नरमी से ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ेगी, जबकि शहरी इलाकों में मांग स्थिर बनी रहेगी। इससे यह साफ है कि इनफ्लेशन एफएमसीजी कंपनियों के भविष्य के लिए बहुत मायने रखता है।
इनफ्लेशन बहुत असर डालता है
RBI ने इकोनॉमिक ग्रोथ का अनुमान व्यक्त करने में बहुत सावधानी बरती है। दिसंबर में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग के बाद एक बयान में कहा गया था कि आगे इनफ्लेशन पर ग्लोबल और घरेलू दोनों ही फैक्टर्स का असर पड़ेगा। अगर, फूड की बात की जाए तो सब्जियों की कीमतों में सीजनल करेक्शन दिख सकता है, लेकिन मोटे अनाज की कीमतें हाई बनी रह सकती हैं। चारे की ज्यादा कीमत का असर दूध की कीमतों पर भी पड़ने के आसार हैं।
RBI के लेटेस्ट अनुमान में इनफ्लेशन फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में 6.7 फीसदी रहने का अनु्मान व्यक्त किया गया है। इससे एफएमसीजी कंपनियां इनपुट कॉस्ट को लेकर दबाव में बनी रहेंगी। इससे रिटेल कीमतें हाई रहेंगी जबकि रूरल डिमांड सुस्त रहेगी।
बजट को लेकर क्या है उम्मीद
एफएमसीजी इंडस्ट्री की ग्रोथ काफी हद तक कंजम्प्शन डिमांड के ट्रेंड पर निर्भर करेगी। जब ग्राहकों के हाथ में खूब पैसे होते हैं तो उनके खर्च बढ़ जाते हैं। इससे एफएमसीजी कंपनियों के उत्पादों की बिक्री भी बढ़ जाती है। बजट से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दी गई सलाह में प्रमुख उद्योग चैंबर CII ने इनकम टैक्स के रेट में कमी करने को कहा है। उसका मानना है कि इससे डिमांड बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सीआईआई के प्रेसिडेंट संजीव बजाज ने कहा, "सरकार को पर्सनल इनकम टैक्स के रेट्स में कमी करना चाहिए। उसे रिफॉर्म पर भी जोर देना चाहिए। इससे लोगों की खर्च करने योग्य बढ़ेगी। इससे डिमांड साइकिल को मजबूती मिलेगी।"