बजट 2023 : अगले 8 साल में 50% बिजली रिन्यूएबल एनर्जी से हासिल करने के लिए बजट में बड़े एलान की जरूरत

Budget 2023: सरकार ने 2030 तक जरूरत की 50 फीसदी बिजली रिन्यूएबल एनर्जी के स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन, अभी रिन्यूएबल एनर्जी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जो रफ्तार है वह बहुत कम है। इसलिए लक्ष्य को हासिल करने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को रिन्यूएबल एनर्जी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बजट में बड़े ऐलान करने होंगे

अपडेटेड Jan 19, 2023 पर 10:48 AM
यूनियन बजट 2023 : नवंबर 2021 में ग्लासगो क्लाइमेट समिट (COP26) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि साल 2030 तक इंडिया बिजली की अपनी 50 फीसदी जरूरत रिन्यूएबल एनर्जी से पूरा करेगा।

Budget 2023: केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से ग्रीन एनर्जी पर फोकस बढ़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार भी बजट (Budget 2023) में सरकार रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाने वाले उपायों का ऐलान करेगी। ग्रीन एनर्जी (Green Energy) के लिए आवंटन भी बढ़ने की उम्मीद है। 2006 में सरकार ने विंड एनर्जी (Wind Energy) के लिए सिर्फ 597 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पेश किया था। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 मे सोलर पावर (Solar Power) सेक्टर के लिए सरकार का आवंटन 3,365 करोड़ रुपये रहा। इससे ग्रीन एनर्जी पर सरकार के बढ़ते फोकस का अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार पब्लिक, प्राइवेट सहित हर सेक्टर में ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश कर रही है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी।

रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन में लक्ष्य से पीछे चल रही सरकार

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रीन एनर्जी प्रोडक्शन के मामले में हम सरकार के तय लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं। पेरिस एग्रीमेंट में सरकार ने 2022 तक रिन्यूएबल एनर्जी की उत्पादन क्षमता के लिए 175 गीगा वॉट (GW) का टारगेट तय किया था। इसमें सोलर के लिए 100 GW, विंड के लिए 60 GW और बायोमास के लिए 10 GW और स्मॉल हाइड्रोपावर के लिए 5 GW शामिल था। लेकिन आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि दिसंबर 2022 तक इंडिया की सोलर पावर कैपेसिटी 63 GW और विंड की करीब 48 GW थी।


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2030 तक 50 फीसदी बिजली रिन्यूएबल एनर्जी से हासिल करने का लक्ष्य

लक्ष्य से पीछे चलने के बावजूद सरकार ने ग्रीन एनर्जी पर अपना फोकस कम नहीं किया है। नवंबर 2021 में ग्लासगो क्लाइमेट समिट (COP26) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि साल 2030 तक इंडिया बिजली की अपनी 50 फीसदी जरूरत रिन्यूएबल एनर्जी से पूरा करेगा। इससे पहले सरकार ने साल 2030 तक अपनी जरूरत की 40 फीसदी बिजली रिन्यूएबल एनर्जी से हासिल करने का लक्ष्य रखा था।

दशक के अंत तक कुल बिजली उत्पादन 820 GW पहुंच सकता है

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस दशक के अंत तक इंडिया में कुल बिजली उत्पादन 820 GW तक पहुंच जाएगा। इसमें Fossil और Non-Fossil दोनों तरह की एनर्जी शामिल है। कोयला, पेट्रोलियम जैसे पारंपरिक ईंधन के इस्तेमाल से बनने वाली बिजली को Fossil Energy कैटेगरी में रखा जाता है। रिन्यूएबल स्रोतों से पैदा होने वाली बिजली को Non-Fossil एनर्जी की कैटेगरी में रखा जाता है।

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रिन्यूएबल एनर्जी की उत्पादन क्षमता जल्द बढ़ानी पड़ेगी

अगर साल 2030 तक सरकार कुल बिजली उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से हासिल करना चाहती है तो रिन्यूएबल एनर्जी की स्थापित क्षमता 400 GW से ज्यादा होनी जरूरी है। इसका मतलब है कि अगले 8 साल में सरकार को रिन्यूएबल एनर्जी की उत्पादन क्षमता में करीब 300 GW जोड़ना होगा। इसके लिए हर साल सरकार को रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में करीब 40 GW की बढ़ोतरी करनी होगी।

अभी इंडिया में एक साल में रिन्यूएबल एनर्जी में मैक्सिमम करीब 14 GW की बढ़ोतरी का रिकॉर्ड है। ऐसे में हर साल 40 GW की बढ़ोतरी का लक्ष्य बहुत मुश्किल लगता है। अगर इस लक्ष्य को हासिल करना है तो रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। सिर्फ सरकार के खर्च से यह लक्ष्य पूरा होने वाला नहीं है।

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