Union Budget 2023: कोरोना की महामारी और यूक्रेन पर रूस के हमले का काफी ज्यादा असर सरकार की वित्तीय स्थिति पर पड़ा है। बजट के आंकड़ों से इसके संकेत मिले हैं। सरकार की वित्तीय स्थिति पर यह असर अगले कुछ साल तक बना रहेगा। पिछले दो साल में सरकार ने अपने खर्च को पूरा करने के लिए काफी पैसे उधार से जुटाए हैं। उधार ज्यादा लेने से इंटरेस्ट पर होने वाला सरकार का खर्च बढ़ा है। इंटरेस्ट पर सरकार का खर्च कोरोना से पहले ही बढ़ना शुरू हो गया था। तब सरकार का कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शंस और बॉरोइंग एक बराबर चल रहे थे। हालांकि, फाइनेंशियल ईयर 2018-19 तक इंटरेस्ट पेमेंट पर होने वाला खर्च सरकार का सबसे बड़ा खर्च नहीं था।
सरकार के कुल बजट में बॉरोइंग की हिस्सेदारी बढ़ी
फाइनेंशियल ईयर 2020-21 से सरकार के खर्च को पूरा करने में बॉरोइंग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा हो गई। इसने कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शंस को नंबर वन पॉजिशन से बेदखल कर दिया। इससे केंद्र सरकार के टैक्स कलेक्शंस में राज्यों की हिस्सेदारी पर भी असर पड़ा। उसके बाद कोरोना की महामारी शुरू हो गई, जिससे सरकार का खर्च और बढ़ गया। इस फाइनेंशियल ईयर में सरकार के कुल बजट में बॉरोइंग की हिस्सेदारी 35 फीसदी पहुंच गई। इसके मुकाबले कुल बजट में कॉर्पोरेट टैक्स की हिस्सेदारी सिर्फ 15 फीसदी रह गई है। पर्सनल और कॉर्पोरेट टैक्स को मिलाने पर कुल बजट में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ 30 फीसदी है।
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FY24 में भी इंटरेस्ट पेमेंट पर बढ़ सकता है खर्च
ज्यादा उधार लेने से सरकार के कुल बॉरोइंग में इंटरेस्ट पेमेंट की हिस्सेदारी 38 फीसदी बढ़कर 9.40 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। सिर्फ दो साल में यह स्थिति बनी है। इस साल इंटरेस्ट रेट्स और बॉरोइंग बढ़ने की वजह से अगले फाइनेंशियल ईयर में सरकार का इंटरेस्ट पेमेंट ज्यादा रहने की उम्मीद है। ऐसे वक्त जब सरकार अपना खर्च बढ़ाने की कोशिश कर रहा है बढ़ता इंटरेस्ट पेमेंट मुसीबत बन सकता है। इस फाइनेंशियल ईयर में टैक्स कलेक्शंस की अच्छी ग्रोथ से सरकार को बहुत मदद मिली है। लेकिन, अगले फाइनेंशियल ईयर में टैक्स कलेक्शंस ग्रोथ सुस्त पड़ने के आसार हैं।