Budget 2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण 1 फरनरी को यूनियन बजट 2023 पेश करने वाली हैं। इस बजट से अलग-अलग वर्गों को खासी उम्मीदें हैं। इस बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी शाखा स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने भी अपनी राय रखी है। SJM के सह-संयोजक अश्विनी महाजन का कहना है कि भारत सरकार को पब्लिक सेक्टर के बैंकों (PSB) को नहीं बेचना चाहिए। महाजन का तर्क है कि इन बैंकों का इस्तेमाल जन धन योजना (फाइनेंशियल इनक्लुजन प्रोग्राम) जैसी सामाजिक कल्याण योजनाओं को लागू करने के लिए हो रहा है, ऐसे में इन बैंकों को नहीं बेचा जाना चाहिए। महाजन ने मनीकंट्रोल के साथ इंटरव्यू में यह बातें कहीं।
निजी क्षेत्र के बैंकों ने कौन से महान कार्य किए हैं : SJM
महाजन ने आगे कहा, “पब्लिक सेक्टर के बैंकों को पब्लिक सेक्टर में बने रहना चाहिए। इन्हें बिल्कुल भी नहीं बेचना चाहिए। हमने यह बार-बार कहा है। निजी क्षेत्र के बैंकों ने कौन से महान कार्य किए हैं?” बता दें कि SJM राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी शाखा है। बैंकों के निजीकरण का विपक्षी दलों ने भी पहले काफी विरोध किया है। ऐसे में 1 फरवरी को होने वाले 2023 के केंद्रीय बजट से पहले SJM की इस टिप्पणी से विपक्ष को बल मिल सकता है। मनीकंट्रोल ने बताया है कि सरकार बहुत कंजर्वेटिव डिस-इन्वेस्टमेंट टारगेट तय कर सकती है और बैंकों और बीमा कंपनियों के निजीकरण को टाल सकती है। आगामी बजट खास है क्योंकि यह 2024 के आम चुनावों से पहले आखिरी पूर्ण बजट है। ऐसे में सरकार कई लोकलुभावन ऐलान कर सकती है।
1 फरवरी, 2021 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 में IDBI बैंक के साथ-साथ पब्लिक सेक्टर के दो बैंकों के निजीकरण का प्रस्ताव दिया था। वर्तमान में भारत में एक दर्जन पब्लिक सेक्टर बैंक हैं, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) भी शामिल है। इसके अलावा, भारत में 21 प्राइवेट बैंक, एक दर्जन स्मॉल फाइनेंस बैंक और चार पेमेंट बैंक के साथ ही 40 से अधिक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और 40 से अधिक विदेशी बैंक हैं। सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में है. लेनदेन 2023-24 की पहली छमाही में पूरा होने की संभावना है।
समस्या मैनेजमेंट को लेकर है, ना कि मालिकाना हक को लेकर: महाजन
महाजन ने आगे कहा कि समस्या मैनेजमेंट को लेकर है, ना कि मालिकाना हक को लेकर। स्वामित्व किसके पास है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। चाहे आप इसके मालिक हों या मैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें बैंकों को अच्छे से चलाना चाहिए।' एसेट क्वालिटी रिव्यू और महामारी के दौरान बैंकों के कैपिटलाइजेशन के बाद हाल के वर्षों में भारतीय बैंकों के बैड लोन कम हुए हैं। मार्च 2022 में सभी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों का ग्रॉस एनपीए रेश्यो मार्च 2021 में 7.3 प्रतिशत से कम होकर 5.8 प्रतिशत हो गया। इस अवधि के दौरान नेट एनपीए 8 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत हो गया।