Budget 2023 Wishlist: निर्मला सीतारमण के बजट में इन 8 बातों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर, क्या आपको भी ये बदलाव होने की उम्मीद है?
Union Budget 2023: यूनियन बजट 2023 को लेकर उम्मीदें इसलिए ज्यादा हैं क्योंकि यह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है। सरकार इनकम टैक्स में राहत देने के साथ ही रोजगार के मौके बढ़ाने और किसानों की कमाई में इजाफा करने के लिए बड़े कदम उठा सकती है
सरकार इनकम टैक्स के मामले में यूनियन बजट 2023 में बड़ा राहत दे सकती है। इनमें सबसे अहम होगा सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाना।
Union Budget 2023: यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) में लोगों की दिचस्पी कुछ ज्यादा दिख रही है। इसकी वजह यह है कि यह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है। इसलिए टैक्सपेयर्स, इनवेस्टर्स, सैलरीड क्लास, इंडस्ट्री से लेकर सबकी अपनी-अपनी उम्मीदें हैं। कृषि क्षेत्र खासकर किसानों को उम्मीद है कि सरकार उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए बजट में बड़े ऐलान करेगी। युवाओं को बजट में रोजगार के मौके बढ़ाने वाले उपायों का इंतजार है। शेयरों के निवेशक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के नियमों में बदलाव की आस लगाए बैठे हैं। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी। हम आपको ऐसी 8 बातें बता रहे हैं, जिनका ऐलान होने की उम्मीद सबसे ज्यादा हैं:
1. कैपिटल गेंस टैक्स (Capital Gains Tax)
चल और अचल संपत्ति को बेचने से होने वाले हुए प्रॉफिट पर कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। अचल संपत्ति का मतलब मकान, जमीन आदि हैं। चल संपत्ति का मतलब शेयर, म्यूचुअल फंड्स यूनिट्स आदि हैं। अभी अलग-अलग एसेट के लिए कैपिटल गेंस टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। इससे लोगों के बीच कैपिटल गेंस टैक्स को लेकर उलझन की स्थिति रहती है। इस बार उम्मीद है कि कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों को आसान बनाने के लिए सरकार यूनियन बजट 2023 में ऐलान करेगी।
बढ़ती महंगाई ने लोगों की जीना मुहाल कर दिया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण उनकी मुश्किल कुछ हद तक दूर कर सकती हैं। वह इंडिविजुअल इनकम टैक्स के नियमों को आसान, पारदर्शी बनाने के साथ ही कम इनकम वाले लोगों के लिए टैक्स रेट घटा सकती हैं। सरकार ने दो-तीन साल पहले न्यू टैक्स रीजीम की शुरुआत की थी। लेकिन, यह बहुत फायदेमंद नहीं रहा है। इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
बजट 2023 आने में बाकी हैं सिर्फ कुछ दिन, इसकी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
3. कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure)
सरकार यूनियन बजट 2023 में पूंजीगत खर्च बढ़ाने पर फोकस कर सकती है। वह प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने के लिए भी उपायों का ऐलान कर सकती हैं। पिछले बजट में भी सरकार ने अपना पूंजीगत खर्च बढ़ाने का ऐलान किया था। खासकर सड़क सहित इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाया था। पूंजीगत खर्च बढ़ाने से रोजगार के नए मौके पैदा करने में मदद मिलती है।
4. फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit)
इस आंकड़ें पर इस बार सबसे ज्यादा निगाहें होंगी। उम्मीद है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण सरकार की वित्तीय सेहत ठीक करने पर फोकस करेंगी। इसे फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) कहा जाता है। इस फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है, जो सरकार के अनुमान जितना है। सरकार फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को कम कर 4.5 फीसदी तक करना चाहती है।
5. फूड सब्सिडी बिल (Food Subsidy Bill)
यूनियन बजट 2023 में फूड सब्सिडी के डेटा पर भी लोगों की नजरें रहेंगी। सरकार ने कोरोना की महामारी के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए फ्री-फूड स्कीम की शुरुआत की थी। इस वजह से सरकार पर फूड सब्सिडी का बोझ बहुत बढ़ गया था। माना जा रहा है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में फूड सब्सिडी पर सरकार के खर्च में काफी कमी आएगी।
6. फर्टिलाइजर सब्सिडी (Fertilizer Subsidy)
अगले फाइनेंशियल ईयर में फर्टिलाइजर सब्सिडी पर भी सरकार का खर्च कम रहने की उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि ग्लोबल मार्केट में फर्टिलाइजर्स की कीमतों में कमी आई है। पिछले साल यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद ग्लोबल मार्केट में फर्टिलाइजर्स की कीमतें बहुत बढ़ गई थी। इससे फर्टिलाइजर पर होने वाला सरकार का खर्च भी बढ़ गया।
7. नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ (Nominal GDP Growth)
स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री ने 6 जनवरी को डेटा जारी किए थे। इसके मुताबिक इस फाइनेंशियल ईयर में इंडिया का नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 15.4 फीसदी रहने की उम्मीद है। रियल या इनफ्लेशन-एडजस्टेड जीडीपी ग्रोथ करीब 7 फीसदी रहने का अनुमान है। नॉनिनल जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों से इकोनॉमी की सेहत का भी संकेत मिलेगा।
8. सेक्शन 80सी (Section 80C)
सरकार इनकम टैक्स के मामले में यूनियन बजट 2023 में बड़ा राहत दे सकती है। इनमें सबसे अहम होगा सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाना। अभी इस सेक्शन के तहत एक फाइनेंशियल ईयर में कुछ तरह के निवेश और खर्च पर 1.5 लाख रुपये का डिडक्शन उपलब्ध है। इसे बढ़ाकर सरकार 2-3 लाख रुपये कर सकती है। इससे पहले जुलाई 2014 में सरकार ने इस लिमिट को 50 रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया था।