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Budget 2024: ग्लोबल चुनौतियों से निपटने के लिए ग्रोथ पर फोकस करना बेहद जरूरी

2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जहां सरकार अंतरिम बजट का खाका तैयार करने में जुटी है, वहीं इकोनॉमी भी अब रिकवरी की राह पर दिख रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी ग्रोथ 7.3 पर्सेंट रहने का अनुमान है। भारत इस साल भी सबसे तेजी से बढ़ने वाले अर्थव्यवस्था बना रहेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 09, 2024 पर 8:44 PM
Budget 2024: ग्लोबल चुनौतियों से निपटने के लिए ग्रोथ पर फोकस करना बेहद जरूरी
भारत इस साल भी सबसे तेजी से बढ़ने वाले अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जहां सरकार अंतरिम बजट का खाका तैयार करने में जुटी है, वहीं इकोनॉमी भी अब रिकवरी की राह पर दिख रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी ग्रोथ 7.3 पर्सेंट रहने का अनुमान है। भारत इस साल भी सबसे तेजी से बढ़ने वाले अर्थव्यवस्था बना रहेगा। हालांकि, अभी भी अर्थव्यवस्था के लिए कई सारी चुनौतियों मौजूद हैं। हम यहां कुछ चुनौतियों के बारे में बता रहे हैं।

बाहरी चुनौतियां

बेहतर परफॉर्मेंस के बावजूद अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर संतुष्ट होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे अगले वित्त वर्ष में हालात गड़बड़ हो सकते हैं। अगर पश्चिम एशिया में स्थितियां खराब होती हैं, तो इसका असर अलग-अलग रूप में पूरी दुनिया पर देखने को मिलेगा। इजराइल-हमास युद्ध में ईरान का सक्रिय होना चिंता की बात है, क्योंकि इससे पश्चिमी देश आक्रामक रुख अपना सकते हैं। तेल की कीमतों में तेजी और ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधा पहुंचने के तौर पर इसका आर्थिक असर भी देखने को मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत के लिए चिंता की बात होगी, क्योंकि यह अपनी फ्यूल की 85 पर्सेंट जरूरतों के लिए इंपोर्ट पर निर्भर है। रूस से कम कीमत में कच्चा तेल उपलब्ध होने की वजह से भारत अपने इंपोर्ट बिल को नियंत्रित रखने में सफल रहा है। इसके अलाना, पिछले दो महीने से कच्चे तेल की कीमतों में सुस्ती का ट्रेंड है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो भारत का करेंट एकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है।

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