इंडिया की ग्रोथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के विस्तार से जुड़ी हुई है। आत्मनिर्भरता का लक्ष्य भी मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ पर निर्भर है। 'मेक इन इंडिया' जैसी पहल से निर्यात बढ़ाने के उपाय करने होंगे। इनोवेशन पर फोकस करना होगा और निवेश बढ़ाना होगा। पीएलआई जैसी स्कीम से कुछ सेक्टर को प्रोत्साहन देंगे। साथ ही समर्थ उद्योग भारत 4.0 से उत्पादनों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ानी होगी। मैन्युफैक्चरिंग की गोथ के साथ विलय और अधिग्रहण के मामले बढ़े हैं। आईपीओ मार्केट गुलजार है। प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश बढ़ा है। इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अगले ढाई दशक तक इंडिया की ग्रोथ का इंजन बना रह सकता है।
