Union Budget 2024: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2024 को छठी बार बजट पेश करेंगी। निर्मला सीतारमण मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करने वाली है क्योंकि उसके बाद देशभर में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सरकार अपने वोट बैंक को भुनाने खासकर नौकरीपेशा लोगों के लिए कई घोषणाएं कर सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार बजट में कर्मचारियों के लिए लेबर कानून को लागू करने के लिए ऐलान कर सकती है। सरकार काफी समय से नए लेबर कानून लागू करने पर विचार कर रही है लेकिन ऐसा नहीं कर पाई है। ऐसा हो सकता है कि बजट के बाद से आपके ऑफिस के काम के घंटे, छुट्टी और हाथ आने वाली सैलरी बदल सकती है। आपके ऑफिस के काम के घंटे 12 घंटे तक हो सकते हैं लेकिन हफ्ते में 2 की जगह 3 दिन छुट्टी मिलेगी। साथ ही हाथ में आने वाला कैश घट सकता है लेकिन पीएफ बढ़ सकता है। मोदी सरकार की योजना जल्द से जल्द लेबर कानून के नियमों को लागू करने की है।
हफ्ते में 3 दिन मिलेगी छुट्टी
1 जुलाई से कंपनियों के पास अधिकार होगा कि वह काम के घंटों को बढ़ाकर 12 घंटे कर सकती है लेकिन फिर एक दिन छुट्टी अधिक मिलेगी। यानी 3 दिन कर्मचारियों को छुट्टी मिल सकेगी। नये नियम लागू होने के बाद कंपनियां, कर्मचारियों को तीन दिन की छुट्टी दे सकेंगी। कर्मचारियों को चार दिनों के लिए प्रति दिन 10 से 12 घंटे काम करना होगा। नए कानूनों का मतलब यह होगा कि ओवरटाइम के अधिकतम घंटे 50 (कारखाना अधिनियम के तहत) से बढ़कर 125 घंटे हो जाएंगे।
सैलरी घटेगी लेकिन बढ़ेगा PF
नए ड्राफ्ट रूल के अनुसार, बेसिक सैलरी कुल वेतन का 50% या अधिक होना चाहिए। इससे ज्यादातर कर्मचारियों की वेतन का स्ट्रक्चर बदल जाएगा, बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी का पैसा ज्यादा पहले से ज्यादा कटेगा। पीएफ बेसिक सैलरी पर आधारित होता है। पीएफ बढ़ने पर टेक-होम या हाथ में आने वाला सैलरी कम हो जाएगी। ग्रेच्युटी और पीएफ में योगदान बढ़ने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला पैसा बढ़ जाएगा। इससे कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद बेहतर जीवन जीने में आसानी होगी।
क्या हैं लेबर कानून – 4 कोड में बंटा है कानून
भारत में 29 सेंट्रल लेबर कानून को 4 कोड में बांटा गया है। कोड के नियमों में वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध (Industrial Relations) और व्यवसाय सुरक्षा (Occupation Safety) और स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति आदि जैसे 4 लेबर कोड शामिल है। अभी तक 23 राज्यों ने इन ड्राफ्ट कानूनों को तैयार कर लिया है। संसद द्वारा इन चार संहिताओं को पारित किया जा चुका है, लेकिन केंद्र के अलावा राज्य सरकारों को भी इन संहिताओं, नियमों को अधिसूचित करना जरूरी है। उसके बाद ही ये नियम पूरे देश और राज्यों में लागू हो पाएंगे।