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Budget 2024: HRA पर टैक्स छूट में मिल सकती है राहत, सैलरीड क्लास को बजट से क्या है उम्मीदें? एक्सपर्ट्स की ये है राय

Budget 2024: कोविड महामारी के बाद देशभर में मकानों का किराया बहुत तेजी से बढ़ा है। मिडिल क्लास का बजट इस किराए के चलते बुरी तरह बिगड़ा हुआ है। ऐसे में HRA डिडक्शन में राहत दिए जाने की उम्मीद है। मौजूदा समय में शहर के हिसाब से HRA दिया जाता है। कई बड़े शहरों को भी मेट्रो सिटी के दायरे में लाने की उम्मीद जताई जा रही है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 16, 2024 पर 5:37 PM
Budget 2024: HRA पर टैक्स छूट में मिल सकती है राहत, सैलरीड क्लास को बजट से क्या है उम्मीदें? एक्सपर्ट्स की ये है राय
Budget 2024: कुछ ही दिनों में सरकार की ओर से देश का आम बजट पेश किया जाना वाला है।

मोदी सरकार एक बार फिर से देश की सत्ता पर काबिज हो चुकी है। इसके साथ ही तीसरी बार सत्ता संभालने के बाद अब कुछ ही दिनों में सरकार की ओर से देश का आम बजट पेश किया जाना वाला है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को यूनियन बजट पेश करेंगी। इस बजट से सैलरीड टैक्सपेयर्स को भी काफी उम्मीदें हैं। जानकारों का कहना है कि बजट में कर्मचारियों को लिए हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA डिडक्शन में राहत दी जानी चाहिए। आइए जानते हैं इसे लेकर एक्सपर्ट्स की क्या है राय।

कोविड महामारी के बाद देशभर में मकानों का किराया बहुत तेजी से बढ़ा है। मिडिल क्लास का बजट इस किराए के चलते बुरी तरह बिगड़ा हुआ है। ऐसे में HRA डिडक्शन में राहत दिए जाने की उम्मीद है। मौजूदा समय में शहर के हिसाब से HRA दिया जाता है। इसके अलावा, हैदराबाद और बेंगलुरु समेत कई बड़े शहरों को भी मेट्रो सिटी के दायरे में लाने की उम्मीद जताई जा रही है। ताकि इन शहरों में नौकरी करने वालों को भी दिल्ली और मुंबई के बराबर HRA का फायदा मिल सके। वर्तमान में, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में किराए के घर को HRA से 50% छूट मिलती है, जबकि अन्य स्थानों पर स्थित घर 40% के दायरे में आते हैं।

Budget 2024: HRA टैक्स छूट पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय

Kailash Chand Jain & Co. में पार्टनर CA अभिषेक जैन ने HRA में छूट में इजाफा करने की वकालत की है। उनका कहना है कि बजट 2024 में सैलरीड क्लास को टैक्स राहत प्रदान करने और उनकी नकद इनकम बढ़ाने के लिए कई बदलाव लाए जाने की संभावना है। प्रमुख उम्मीदों में हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट में वृद्धि शामिल है, जो विशेष रूप से महानगरों में बढ़ती किराए की लागत को संतुलित करेगी। इससे टैक्सेबल इनकम कम होगी और किराए के आवास में रहने वालों के लिए आवास की अफोर्डिबिलिटी बढ़ेगी।

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