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Budget Adda: बजट से क्यों मायूस हुआ बाजार, बड़ा मौका चूकीं निर्मला सीतारामण!

इकोनॉमी जिस मुश्किल दौर में फंसी है उससे बाहर निकालने के लिए संकटमोचक के आशीर्वाद की ही जरूरत है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 03, 2020 पर 8:53 AM
Budget Adda: बजट से क्यों मायूस हुआ बाजार, बड़ा मौका चूकीं निर्मला सीतारामण!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन का चैलेंज बड़ा था। आम लोगों से लेकर इंडस्ट्री और मार्केट की बड़ी उम्मीदों के बीच निर्मला सीतारामन की सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि वो किस किस की उम्मीदों को पूरा करें। सबसे लंबे बजट भाषण के बाद जो बातें निकल कर आईं वो ये थी कि भाई वित्त मंत्री की नीयत तो ठीक है लेकिन ये हो जाता तो और अच्छा हो जाता। यही वजह है कि गांव-देहात, किसान और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए उनके बड़े एलाने के बावजूद जो जोश होना चाहिए था तो गायब रहा। यानी लॉन्ग टर्म ग्रोथ के मकसद से उठाए गए कदमों से बाजार को कोई फौरी राहत मिलती नजर नहीं आई वो बुरी तरह लड़खड़ा गया। बजट से क्यों मायूस हुआ बाजार, बड़ा मौका चूकीं निर्मला सीतारामन?  इसी सवाल पर आधारित है आज के Budget Adda की बड़ी बहस। आज की इस बड़ी चर्चा में सीएनबीसी-आवाज़ के साथ हैं, पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रुडी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, ASSOCHAM के प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी, टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा।

इकोनॉमी जिस मुश्किल दौर में फंसी है उससे बाहर निकालने के लिए संकटमोचक के आशीर्वाद की ही जरूरत है। शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन और उनकी अपनी टीम ये दारोमदार था कि वो जोश भरें। उनसे उम्मीद यही थी कि इस बार वो बोल्ड और लीक से हटकर कुछ करेंगी। हर किसी को कुछ थमा कर खुश करने की कोशिश करने की जगह चंद असरदार कदम उठाएंगी। बजट के शुरुआती हिस्से में रुरल इंडिया, किसान और सोशल सेक्टर के लिए उनके एलानों से साफ था कि सरकार अपने सामाजिक सरोकारों से कोई समझौता नहीं करना चाहती। मौजूदा वित्त में फिस्कल डेफिसिट के टारगेट मिस होना था। ये 3.8 फीसदी पर पहुंच गया। 2020-21 के लिए भी सरकार ने वित्तीय घाटे का लक्ष्य 3.5 फीसदी पर रखा है। यानी ग्रोथ के लिए डेफिसिट की फिक्र ना करें ये बात तो मान ली।

लेकिन बाजार और इंडस्ट्री को जो बात पसंद नहीं आई वो शायद ये रही कि जितने खर्च का एलान सरकार ने किया है उसके लिए पैसे जुटाने का ब्यौरा देने में वो कंजूसी कर गई। उसे डिटेल्स चाहिए था। जिस कन्जम्पशन को तुरंत बढ़ाने की जोरशोर से बात की जा रही थी उसका खास खयाल नहीं रखा गया। उधऱ इनकम टैक्स में 15 लाख तक टैक्स के नए स्लैब के एलान और उस पर करीब 75 हजार रुपए की बचत के एलान से मिडिल क्लास को गदगद हो जाना चाहिए था। लेकिन उसके साथ सरकार ने कई रियायतें वापस लेने की बात कही है। यानी मजा किरकिरा हो गया। कन्फ्यूजन इस बात को लेकर भी बना हुआ है कि जो लोग चाहें वो मौजूदा टैक्स स्लैब में भी बने रह सकते हैं।

डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स कंपनियों पर नहीं लगेगा लेकिन ये भार अब निवेशकों पर डाल दिया गया है। कह रहे हैं कि भारतीय निवेशकों से ज्यादा फायदा विदेशी निवेशकों को मिलेगा। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट सहयोगी निर्मला सीतारामन को फुल मार्क्स देते हैं। वो इसे एक संतुलित बजट मानते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट की काफी तारीफ की है। उन्होंने कहा दशक के पहले बजट में विजन भी है और एक्शन भी है। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स की नई स्कीम से आम आदमी को बड़ी राहत मिलेगी तो गांव और किसान पर बजट में खास फोकस रखा गया है।

रेल और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि निर्मला सीतारामन ने एक बैलेंस बजट पेश किया है। रेलवे को पैसा बढ़ाकर मिला है और इसका उपयोग यात्री सुविधा और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर किया जाएगा। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बजट को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि बजट से बाजार उतना खुश नहीं नजर आ रहा है लेकिन आम आदमी को नए इनकम टैक्स स्लैब से कई राहत मिलेगी। केंद्रीय बजट पर सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नई लॉजिस्टिक पॉलिसी से एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा मिलेगा। हमसे खास एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने कहा कि 2023 तक दिल्ली मुंबई हाइवे पूरा बन जाएगा।

कोटक AMC के MD और CEO और PMEAC के मेंबर निलेश शाह ने कहा कि इनकम टैक्स पर सरकार ने आम आदमी को काफी कंफ्यूज कर दिया है। मार्केट एक्सपर्ट वल्लभ भंशाली ने इस बजट को बेहद सकारात्मक बजट बताया है। उन्होंने कहा कि ये बजट भविष्य के लिए बेहतर साबित होगा। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट की जरूरत थी।

बजट जैसे बड़े मौके पर विपक्ष वैसे भी वाहवाही नहीं करता। इस बार उसके पास कुछ ठोस दलीलें हैं। विपक्ष को बजट पसंद नहीं आया है। कांग्रेस ने इसे खोखला बताया। पी चिदंबरम ने कहा कि इनकम टैक्स स्कीम के अलावा इसमें कुछ भी नया नहीं है। तो वहीं राहुल गांधी ने इस बजट को खोखला करार दिया।

सवाल ये है कि क्या निर्मला जी एक बड़ा मौका चूक गईं। क्या बजट से ग्रोथ को रफ्तार मिलेगी। बाजार जिस तरह लहूलुहान है आखिर वो इस बजट में क्या पढ़ रहा है। या हमने उम्मीदें ज्यादा लगा रखी हैं जिसका टूटना तय था क्योंकि सरकार के पास कुछ खास गुंजाइश नहीं है। आज का बजट अड्डा इन्हीं सवालों के जवाब खोजने की एक कोशिश है।

 

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