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किस फाइनेंस मिनिस्टर ने नेहरू से मनमुटाव के कारण बजट से पहले इस्तीफा दिया था?

क्या आप जानते हैं किस फाइनेंस मिनिस्टर ने पहली बार सर्विस टैक्स लगाया था?

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 28, 2020 पर 5:14 PM
किस फाइनेंस मिनिस्टर ने नेहरू से मनमुटाव के कारण बजट से पहले इस्तीफा दिया था?

Budget 2020। क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आजाद होने के कितने महीनों के बाद भारत ने अपना बजट पेश किया होगा? आजादी के सिर्फ तीन महीने के भीतर नई सरकार ने अपना बजट पेश कर दिया था। 26 नवंबर 1947 को आर के शणमुखम चेट्टी ( RK Shanmukham Chetty) ने पहली बार आजाद भारत का पहला बजट पेश किया था। यह पूर्व बजट नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की समीक्षा थी।

क्या खास था पहले बजट में?

इस बजट में किसी तरह के टैक्स लगाने का ऐलान नहीं किया गया था। दरअसल में अगस्त में भारत आजाद हुआ और 26 नवंबर को अंतरिम बजट पेश किया गया था। फाइनेंशियल ईयर 1948-49 का बजट पेश होने में सिर्फ 95 दिन बाकी थे। लिहाजा चेट्टी ने कोई टैक्स ना लगाने का फैसला किया था। यह बजट सिर्फ 7 महीने के लिए था। इसमें चेट्टी ने 6.52 करोड़ रुपए के घाटे का बजट पेश किया था। इसमें आमदनी 172.77 करोड़ रुपए और खर्च 178.77 करोड़ रुपए का था। 

हालांकि इसी बीच देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ मनमुटाव होने के कारण चेट्टी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। चेट्टी के जाने के बाद के सी नियोगी को फाइनेंस मिनिस्टर बनाया गया था। देश के तीसरे फाइनेंस मिनिस्टर जॉन मथाई थे। मथाई ने 1950-51 में बजट पेश किया था।

चुनी गई संसद का पहला बजट

इसके बाद अगले फाइनेंस मिनिस्टर डी देशमुख थे। देश में पहली बार देशमुख ने ही चुनी गई संसद में पहला बजट पेश किया था। 1955-56 में पहली बार बजट हिंदी में तैयार किया गया था।

सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड

1959 में मोरारजी देसाई देश के फाइनेंस मिनिस्टर बने थे। उनके नाम सबसे ज्यादा 10 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है।

अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने पांच पूर्ण और एक अंतरिम बजट पेश किया था। दूसरे कार्यकाल में उन्होंने तीन पूर्ण और एक अंतरिम बजट पेश किया था। दूसरे कार्यकाल में उनके पास फाइनेंस मिनिस्टर और डिप्टी प्राइम मिनिस्टर दोनों पद थे।

मोरारजी देसाई इकलौते ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें दो बार अपने जन्मदिन पर बजट पेश करने का मौका मिला था। मोरारजी का जन्म 29 फरवरी को हुआ था। तब बजट फरवरी की आखिरी तारीख को पेश किया जाता था। 2017 में स्वर्गीय अरुण जेटली ने इस तारीख को बदलकर 1 फरवरी कर दिया था।

1967 के चौथे आम चुनाव के बाद मोरारजी देसाई एकबार फिर फाइनेंस मिनिस्टर बने। यह उनका दूसरा कार्यकाल था. उनके इस्तीफा देने के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने फाइनेंस पोर्टफोलियो अपने पास रख लिया था।

1987-88 में राजीव गांधी के मंत्रीमंडल से वीपी सिंह के निकलने के बाद राजीव गांधी ने खुद बजट पेश किया था। अपनी मां इंदिरा गांधी और नाना जवाहर लाल नेहरू के बाद बजट पेश करने वाले वे पहले प्रधानमंत्री थे।

इसके बाद यशवंत सिन्हा फाइनेंस मिनिस्टर बने और 1991-92 का बजट पेश किया। मई 1991 के चुनाव के बाद कांग्रेस फिर सत्ता में आई और मनमोहन सिंह फाइनेंस मिनिस्टर बने।

कब शुरू हुआ सर्विस टैक्स?

भारतीय इतिहास में फाइनेंस मिनिस्टर के तौर पर मनमोहन सिंह की भूमिका काफी अहम थी। उन्होंने न सिर्फ देश की इकनॉमी को खोला बल्कि विदेशी निवेश को भी बढ़ावा दिया।

मनमोहन सिंह के फाइनेंस मिनिस्टर बनने से पहले इंपोर्ट ड्यूटी 300 फीसदी से ज्यादा था। मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में इसे घटाकर 50 फीसदी तक किया। इसी दौरान उन्होंने सर्विस टैक्स की शुरुआत की थी।

क्यों शाम को पेश होता था बजट

साल 2000 तक यूनियन बजट फरवरी के आखिरी दिन शाम 5 बजे पेश होता था। यह परंपरा अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही थी। भारत में जब शाम के 5 बजते हैं तब लंदन में सुबह के 11.30 बजते हैं। लिहाजा ब्रिटिश अधिकारी लंदन के टाइम टेबल से बजट पेश करते थे। यह परंपरा आजादी के बाद भी चलती रही। इसके बाद यशवंत सिन्हा ने 2001 में बजट पेश करने का टाइम शाम 5 बजे के बजाय सुबह 11 बजे कर दिया।

प्रतिमा शर्मा

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