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इकोनॉमिक सर्वे 2020: अरस्तु से कौटिल्य, राजन से लेकर थैचर, CEA ने शामिल किया सबका ज्ञान

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यन ने प्राचीन ग्रंथों के सार का इस्तेमाल आज की पॉलिसी में किया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 01, 2020 पर 8:57 AM
इकोनॉमिक सर्वे 2020: अरस्तु से कौटिल्य, राजन से लेकर थैचर, CEA ने शामिल किया सबका ज्ञान

पवित्र ग्रंथ सिर्फ नैतिकता का सार नहीं होते। ना ही कविता सिर्फ उनके लिए है जिन्हें साहित्य पसंद हो। इन प्राचीन ग्रंथों का इस्तेमाल क्यों नहीं अकादमिक बहस में होना चाहिए? अगर किसी चीज पर भरोसे की बात करें तो यह सिर्फ मनोविज्ञान से जुड़ा नहीं है।  

इन प्राचीन ग्रंथों में ऐसे कई सबक हैं जिनके आधार पर आज पॉलिसी बनाकर इकोनॉमी की जटिल मुश्किलों से निपट सकते हैं। भारत के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने इकोनॉमिक सर्वे 2019-20 में इन ग्रंथों में की गई बातों का पूरा इस्तेमाल किया है।   

लैवेंडर कलर के इस सर्वे में 21 चैप्टर हैं। इनमें प्राचीन दर्शन, संतों, जाने-माने साहित्यकारों, नोबल विजेताओं और आधुनिक नेताओं की बातों का भी जिक्र किया है। सर्वे में दो बार प्रस्तावना है।

इकोनॉमिक सर्वे के डॉक्यूमेंट्स में वेल्थ क्रियेशन की बात की गई है। इसमें कौटिल्या के अर्थशास्त्र से लेकर तिरुवल्लुर के "तिरुकुरल" की भी चर्चा की गई है। इनका जोर इस बात पर रहा है कि सही ढंग से कमाई गए धन से ही वेल्थ क्रिएशन होता है।

इकोनॉमिक सर्वे में World Economy I-2030 AD का भी जिक्र किया गया है। यह एंगस मैडिसन (Angus Maddison) की अहम किताब मानी जाती है। मैडिसन एक  ब्रिटिश इकोनॉमिस्ट हैं जिनका क्वांटिटेटिव माइक्रोइकोनॉमिक हिस्ट्री में स्पेशलाइजेशन है। इनकी दलील है कि इकोनॉमिक हिस्ट्री का तीन चौथाई हिस्से में दुनिया भर पर भारत के इकोनॉमिक पावर का प्रभुत्व रहा है। उनका कहना है, "इस तरह का प्रभुत्व कोई संयोग नहीं बल्कि डिजाइन है।"

वेल्थ क्रियेशन के चैप्टर "Wealth Creation: The Invisible Hand Supported by the Hand of Trust" में सुब्रमण्यन ने तिरुकुरल का जिक्र किया है। तमिल भाषा के इस साहित्य में 1330 श्लोक हैं। इसके चैप्टर 76 के 759वें श्लोक में लिखा है कि "अपने दुश्मन के सम्मान को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है पैसा बनाओ।"  

इकोनॉमिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए फ्री मार्केट पर हमेशा जोर रहता है। सर्वे में कौटिल्या की बातों का कई बार जिक्र किया गया है। कौटिल्या हमेशा मुक्त अर्थव्यवस्था की सिफारिश करते हैं। उन्हें राजा को भी आर्थिक गतिविधियों की सारी अड़चनें दूर करने को कहा है।

कौटिल्या के किताब अर्थशास्त्र में वार्ता, दंडनीति, आन्वीक्षिकी (तर्कशास्त्र) और त्रयी (वैदिक ग्रन्थों) की बात की गई है।

फ्रेड्रिक हाएक ने भी ना सिर्फ इकोनॉमिक फ्रीडम पर जोर दिया है बल्कि सबके लिए बराबर का नियम भी तय किया है। इकोनॉमिक सर्वे में नोबल विजेता मिल्टन फ्रायडमैन की बात का जिक्र करते हुए कहा गया है, " लोगों में एक यह गलत धारणा है कि फ्री मार्केट का सपोर्ट करने वाले लोग बड़े कारोबार का पक्ष लेते हैं। लेकिन यह सच नहीं है।"

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और लुईगी जिंगल्स (Luigi Zingales) की किताब "Saving capitalism from the Capitalists" की उस चेतावनी का जिक्र किया है कि निजी हितों पर रेगुलेटर का कब्जा है। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने इकोनॉमिक सर्वे में श्रीमद भगवत गीता का भी जिक्र किया है। 

सुब्रमण्यन ने सर्वे रिपोर्ट में थालीनॉमिक्स का भी जिक्र किया है। जिसमें उन्होंने यह जानने की कोशिश की है कि भारत में आम लोगों के लिए थाली कितनी महंगी या सस्ती हुई है।

गौरव चौधरी-डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर

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