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Economic Survey 2020: जानिए सर्वे में पेश Thalinomics क्या है?

थालीनॉमिक्स का आधार आम आदमी से जुड़ा हुआ है, जानिए आम आदमी के जीवन पर इसका क्या असर है?

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 01, 2020 पर 9:03 AM
Economic Survey 2020: जानिए सर्वे में पेश Thalinomics क्या है?

Economic Survey 2020: फाइनेंस मिनिस्ट्री के हर चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) चाहते हैं कि वह इकोनॉमिक सर्वे में कुछ नया पेश करें। आज बारी चीफ इकनॉमिक एडवाइजर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन की थी। उन्होंने भी इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट में थालीनॉमिक्स (Thalinomics) के साथ कुछ नया पेश करने का प्रयास किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि थालीनॉमिक्स क्या है?

क्या है थालीनॉमिक्स?

किसी आम आदमी के थाली खरीदने की क्षमता के आधार पर थालीनॉमिक्स का कॉन्सेप्ट रखा गया है। इसके लिए फिस्कल ईयर 2006 से लेकर फिस्कल ईयर 2020 के बीच 28 राज्यों में खाने-पीने की चीजों के दामों का एनालिसिस किया है। दूसरे शब्दों में कहें तो "थालीनॉमिक्स" एक तरीका है जिसके जरिए भारत में फूड अफोर्डेबिलिटी का पता चलता है। यानी एक प्लेट खाने के लिए एक भारतीय को कितना खर्च करना पड़ता है, इसका पता थालीनॉमिक्स से चलता है।
   
भोजन एक बुनियादी जरूरत है। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का असर डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तरीके से  आम लोगों पर पड़ा है। इकोनॉमिक सर्वे 2020 के मुताबिक, फिस्कल ईयर 2016 से वेज थाली की कीमतें कम हुई हैं। हालांकि फिस्कल ईयर 2019 में खाने-पीने की चीजें महंगी हो गईं।

सर्वे में पता चला है कि "थालीनॉमिक्स" से पता चला है कि फिस्कल ईयर 2006 से लेकर फिस्कल ईयर 2020 तक वेज थाली की अफोर्डेबलिटी 29 फीसदी और नॉनवेज थाली की अफोर्डेबिलिटी 18 फीसदी बढ़ी है।

फिस्कल ईयर 2015-16 के दौरान कई रिफॉर्म किए गए थे जिसकी वजह से कृषि उत्पादकता बढ़ी है। 2019 में भारत की महंगाई दर पिछले 5 साल में सबसे ज्यादा रही। दिसंबर में यह बढ़कर 7.35 फीसदी हो गई थी जिसकी सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दाम में बढ़ोत्तरी थी। इस थालीनॉमिक्स  के लिए 25 राज्यों के 80 सेंटर्स के डाटा का इस्तेमाल किया गया है।

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