केंद्र सरकार फिलहाल कई वजहों से बढ़ते फिस्कल डेफिसिट से जूझ रही है। इस वित्तीय वर्ष में सरकार अपने फिस्कल डेफिसिट को कम करने के लिए अपने खर्चों में कमी लाने पर विचार कर रही है। खबर है कि सरकार पिछले कुछ सालों में आए सबसे बड़े टैक्सफॉल यानी टैक्स कलेक्शन में आई कमी के चलते अपने खर्चों में 2 लाख करोड़ की कमी ला सकती है।
livemint ने तीन सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सरकार खर्चों में 2 लाख करोड़ की कमी ला सकती है। पिछले छह सालों में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में कमी आने की वजह भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी सबसे धीमी रफ्तार देख रही है और आगे भी इसमें कमी बढ़ सकती है, ऐसे में सरकार खर्च कम करने का रास्ता देख रही है।
सरकार की कोशिश है कि इस वित्तीय वर्ष में GDP के तहत फिस्कल डेफिसिट 3.8 फीसदी तक हो। पहले यह टारगेट 3.3 फीसदी पर था। सूत्रों ने यह भी बताया कि सरकार रिवाइज्ड फिस्कल डेफिसिट को बनाए रखने के लिए 300 अरब से 500 रुपए का और उधार ले सकती है।
सरकार के रेवेन्यू में 2.5 लाख करोड़ की कमी हुई है, ऐसे में सरकार को अपना डेफिसिट घटाना ही पड़ेगा। सरकार ने नवंबर तक अपने एक्सपेंडिचर टारगेट यानी खर्च के लक्ष्य साथ रखी गई कुल 27.86 लाख करोड़ की पूंजी में से 65 फीसदी पूंजी खर्च कर दिया है। लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने पिछले अक्टूबर और नवंबर में सरकार ने अपने खर्चों में कमी की है। अगर सरकार खर्चों में 2 लाख करोड़ तक की कमी लाती है, तो वो अपने साल भर के खर्च के लक्ष्य में से 7 फीसदी की कटौती कर रही होगी।
सरकार ने सितंबर में 3.1 लाख करोड़ रुपए खर्च किए थे, जो अक्टूबर और नवंबर में घटकर 1.6 लाख करोड़ पर आ गया।
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