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बजट 2020: निर्मला सीतारमण के लिए हकीकत और उम्मीदों में तालमेल बनाना मुश्किल होगा

अभी कई ऐसे इंडिकेटर्स हैं जो पिछले कई साल के निचले लेवल पर है। इनवेस्टमेंट ग्रोथ घटकर सिर्फ 1 फीसदी रह गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 30, 2020 पर 10:50 AM
बजट 2020: निर्मला सीतारमण के लिए हकीकत और उम्मीदों में तालमेल बनाना मुश्किल होगा

Budget 2020 । इस साल बजट ऐसे दौर में पेश किया जाएगा जब इकोनॉमी की ग्रोथ 5 फीसदी रह सकती है। यह पिछले कई दशकों का सबसे निचला स्तर है। इस महीने की शुरुआत में ही सरकार ने 5 फीसदी इकोनॉमी ग्रोथ का अनुमान जताया था। कमजोर ग्रोथ के कारण सरकारी खजाने की हालत भी अच्छी नहीं है। फिस्कल ईयर खत्म हो रहा है। ऐसे में सरकार की आमदनी अपने टारगेट से अभी 2 लाख करोड़ रुपए कम है।

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, इस बार निर्मला सीतारमण जब 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी तब उन्हें लोगों की उम्मीद और हकीकत के संतुलन बनाने का मुश्किल काम करना होगा।

क्या है मुश्किल?

अभी कई ऐसे इंडिकेटर्स हैं जो पिछले कई साल के निचले लेवल पर है। इनवेस्टमेंट ग्रोथ घटकर सिर्फ 1 फीसदी रह गया है। यह पिछले 17 साल का सबसे लो लेवल है।

इसके अलावा GDP ग्रोथ 5 फीसदी पर आ गई है जो पिछले 11 साल में सबसे कम है।

प्राइवेट कंजम्प्शन 5.8 फीसदी है जो पिछले 7 साल का सबसे निचला लेवल है।

इनवेस्टमेंट की ग्रोथ सिर्फ 1 फीसदी रह गई है जो पिछले 17 साल में सबसे कम है।

मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ 2 फीसदी रह गई है। यह पिछले 15 साल में सबसे कम है।

कृषि की बात करें तो इसकी ग्रोथ 2.8 फीसदी है जो पिछले 4 साल में लोएस्ट है।

महंगाई का बढ़ता बोझ

दिसंबर 2019 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 7.35 फीसदी हो गई। यह RBI के इनफ्लेशन बैंड से ज्यादा है। सब्जियों की कीमतें बढ़ने की वजह से महंगाई दर ज्यादा रही। पिछले साल RBI ने 6 बार रेपो रेट घटाए। कुल मिलाकर 2019 में RBI ने रेपो रेट में कुल 1.35 फीसदी की कमी की थी। अब RBI महंगाई दर में कमी का इंतजार करेगा। उसके बाद ही रेपो रेट में नई कटौती के बारे में सोचेगा।

फिस्कल डेफिसिट बढ़ेगा

सरकार इस फिस्कल ईयर में फिस्कल डेफिसिट का टारगेट हासिल नहीं कर पाएगा। मुमकिन है कि सरकारी घाटा अनुमान से 0.5% कम रह सकता है। इसका मतलब है कि फिस्कल डेफिसिट इस वित्त वर्ष में 3.8 फीसदी रह सकता है जबकि टारगेट 3.3 फीसदी है। अगर सरकार बजट में बड़े ऐलान करती है तो इसे फिस्कल डेफेसिट और बढ़ सकता है।

कमजोर टैक्स कलेक्शन

इस फिस्कल ईयर में टैक्स कलेक्शन में 2 लाख करोड़ रुपए की कमी हो सकती है। अगर सरकार खर्च बढ़ाने का फैसला लेती है तो सरकारी खजाने में और कमी आ सकती है।

ज्यादा कैपिटल एक्सपेंडिचर की उम्मीद कम

सरकार के पास खर्च बढ़ाकर इकोनॉमी की स्पीड बढ़ाने की उम्मीद कम है। एकतरफ इकोनॉमी में सुस्ती है और दूसरी तरफ सरकार के पास खर्च बढ़ाने के विकल्प बहुत कम हैं। फिस्कल ईयर 2019 में सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर 3.17 लाख करोड़ रुपए है। वहीं फिस्कल ईयर 2020 में यह 3.39 लाख करोड़ रुपए रहा। फिस्कल ईयर 2021 में अब तक 2.14 लाख करोड़ रुपए ही सरकार खर्च पाएगी।  

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