केंद्र सरकार ने फिस्कल ईयर 2020-21 में डिफेंस बजट के लिए 3.37 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। पिछले फिस्कल ईयर के मुकाबले इसमें सिर्फ 5.8 फीसदी का इजाफा किया गया है। इसमें भी सबसे निराशाजनक बात यह है कि पूंजीगत व्यय (Capital outlay) में बहुत मामूली इजाफा किया गया है जबकि अनुमान ज्यादा था। पूंजीगत व्यय कम होने का असर डिफेंस से जुड़ी उन परियोजनाओं पर होगा जो चीन और पाकिस्तान के खिलाफ चल रही हैं।
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने इस साल बजट में डिफेंस बजट का जिक्र भी नहीं किया है जबकि मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में वह डिफेंस मिनिस्टर थीं। बजट में डिफेंस सेक्टर का कोई जिक्र ना होना इस बात की तरफ संकेत देता है कि इस सेक्टर को बजट में ज्यादा अहमियत नहीं दी गई है।
फिस्कल ईयर 2020-21 के लिए डिफेंस बजट कुल 3.37 लाख करोड़ रुपए का है। इसमें से सिर्फ 1.18 लाख करोड़ रुपए पूंजीगत खर्च और 2.18 लाख करोड़ रुपए रेवेन्यू एक्सपेंडीचर (सैलरी, पेंशन, इंटरेस्ट, एडमिनिस्ट्रेशन पर खर्च) के लिए है। इसके अलावा 1.33 लाख करोड़ रुपए पेंशन के लिए आवंटित किए गए हैं जो 3.37 लाख करोड़ रुपए से अलग है।
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, फिस्कल ईयर 2020-21 के लिए डिफेंस बजट कुल 3.37 लाख करोड़ रुपए का है। इसमें से सिर्फ 1.18 लाख करोड़ रुपए पूंजीगत खर्च और 2.18 लाख करोड़ रुपए रेवेन्यू एक्सपेंडीचर (सैलरी, पेंशन, इंटरेस्ट, एडमिनिस्ट्रेशन पर खर्च) के लिए है।
फिस्कल ईयर 2019-20 में डिफेंस सेक्टर में पूंजीगत व्यय के लिए 1.08 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। फिस्कल ईयर 2020-21 के लिए इसे बढ़ाकर 1.18 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। इस हिसाब से इसमें सिर्फ 10,306.2 लाख करोड़ रुपए का ही इजाफा हुआ है।
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