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Budget 2021-22: खास बजट की खास टीम, कौन लोग हैं खास

बजट से पहले और बजट के बाद जिस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी वो हैं विनिवेश विभाग के सचिव तुहीन कांता पांडे।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 08, 2021 पर 7:09 PM
Budget 2021-22: खास बजट की खास टीम, कौन लोग हैं खास

एक फरवरी को पेश होने वाले बजट को लेकर वित्त मंत्रालय में तैयारियां जोरों पर हैं। इसमें जुटे अधिकारियों की टीम की क्या है इस बार खासियत और क्या हैं चुनौतियां इस पर बात करते हुए  सीएनबीसी-आवाज़ के मार्केट पॉलीसी एडीटर लक्ष्मण रॉय ने बताया कि कोरोना की चुनौतियों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना तीसरा बजट पेंश करेंगी। ये अब तक का सबसे अलग बजट होगा।

जैसा कि  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा किया है, ये बजट बाकी बजट से काफी अलग रहने वाला है। इसे खास बनाने में वित्त मंत्रालय की अधिकारियों की खास टीम दिन रात मेहनत में जुट गई है। इस टीम के मुखिया हैं वित्त सचिव अजय भूषण पांडे। कोरोना से आर्थिक मोर्चे पर परेशान हर तबका बजट से उम्मीद लगाए बैठा है। टैक्स बढ़ाने की गुंजाईश काफी कम है। ऐसे में पैसे कहां से जुटाए जाएं ये अजय भूषण पांडे जी की सबसे बड़ी चुनौती रहने वाली है।

 बजट बनाने वाली टीम में इस बार एक नया चेहरा है तरुण बजाज। हालांकि आर्थिक मामलों के सचिव तरुण बजाज वित्त मंत्रालय के लिए नए नहीं हैं। इससे पहले दो बार अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। आत्मनिर्भर भारत पैकेज बनाने, निवेश बढ़ाने में इनकी भूमिका काफी अहम रही है। 1988 बैच के तरुण बजाज इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में एडिशनल सेक्रेटरी के तौर पर काम कर चुके हैं।

इसी तरह एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी टी वी सोमनाथन भी प्रधानमंत्री कार्यालय में काम कर चुके हैं और इस बार बजट में इनकी सबसे बड़ी चुनौती रहने वाली है कि सीमित संसाधनों के बीच कैसे हर जरूरतमंद तक सरकारी मदद पहुंचाई जाए।

लेकिन बजट से पहले और बजट के बाद जिस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी वो हैं विनिवेश विभाग के सचिव तुहीन कांता पांडे। 1987 बैच के ओडिशा कैडर के तुहीन कांता पांडे भले ही कोरोना की वजह से विनिवेश का लक्ष्य पाने में इस बार विफल रहे, लेकिन अगले कारोबारी साल के लिए इन पर विनिवेश के रास्ते पर तेजी से बढ़ने की चुनौती रहेगी।

1987 बैच के यूपी कैडर के IAS देबाशीश पांडा के ऊपर एक तरफ दबाव इस बात का है कि बैंक जरूरतमंदों को ज्यादा से ज्यादा कर्ज दें तो दूसरी तरफ अगले कारोबारी साल में सरकारी बैंकों के निजीकरण में भी इनकी भूमिका अहम रहने वाली है।

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