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Railway Budget 2023: मजेदार होगा रेल सफर, निर्मला सीतारमण ने रेलवे के लिए आवंटन बढ़ाया

Railway Budget 2023: केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर सरकार का फोकस बढ़ा है। सरकार यात्रियों को बेहतर ट्रेवल एक्सपीरियंस भी देना चाहती है। इसके लिए ज्यादा रफ्तार वाली नई ट्रेनें की संख्या बढ़ाई जा रही है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 01, 2023 पर 1:33 PM
Railway Budget 2023: मजेदार होगा रेल सफर, निर्मला सीतारमण ने रेलवे के लिए आवंटन बढ़ाया
Railway Budget 2023: रेलवे के लिए आवंटित बजट का बड़ा हिस्सा रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर खर्च होगा।

Railways Budget 2023: अब रेल से सफर करने के लिए आपको सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ट्रेन का सफर मजेदार होने जा रहा है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रेलवे के लिए दिल खोलकर पैसे दिए हैं। अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए उन्होंने 2.4 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है। वित्तमंत्री ने कहा कि यह फाइनेंशियल 2013-14 के मुकाबले 9 गुना है। पिछले बजट में उन्होंने रेलवे के लिए 1.40 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया था।

पिछले वित्त वर्ष यानी 2021-22 के लिए उन्होंने रेलवे के लिए 1.10 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया था। सरकार यात्रियों के लिए ट्रेन का सफर बेहतर बनाने के लिए लगातार रेलवे के लिए आवंटन बढ़ा रही है।2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से रेलवे पर सरकार खास ध्यान दे रही है।

खासकर रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर सरकार बहुत निवेश कर रही है। इसके नतीजें दिखे हैं। रेल हादसों में कमी आई है। पैसेंजर्स सेफ्टी बहुत बढ़ी है। रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा रहा है। देश में कई स्टेशनों को मॉडल स्टेशन के तौर पर विकसित किया गया है। इससे यात्रा का अनुभव बेहतर हुआ है।

पिछले बजट में वित्तमंत्री ने अगले 3 साल में 400 वंदे भारत ट्रेनें शुरू करने का ऐलान किया था। ये सेमी हाईस्पीड ट्रेनें हैं। इनकी मैक्सिमम स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटे हैं। लेकिन, अभी तक 8 वंदे भारत ट्रेनें ही शुरू की जा सकी हैं। ज्यादा संख्या में इन ट्रेनों के शुरू होने से यात्रा में लगने वाला समय काफी घट जाएगा। इनके कोच भी पुराने कोचों के मुकाबले अरामदेह हैं। पिछले बजट में वित्तमंत्री ने 100 गति शक्ति कार्गो टर्मिनिल शुरू करने का ऐलान किया था। इन्हें तीन साल में विकसित किया जाना था।

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