Union Budget 2023: सरकार की कोशिशों के बावजूद आबादी के बड़े हिस्से की पहुंच एजुकेशन खासकर हायर एजुकेशन तक नहीं हो पाई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को प्राइवेट और पब्लिक एंटरप्राइजेज के लिए सब्सिडी बढ़ानी चाहिए। इससे एजुकेशन सेक्टर में निवेश करने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। पूरी आबादी को एजुकेशन फैसिलिटीज उपलब्ध कराने से इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। जालंधर में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता रोहित सूद ने कहा कि इससे सबको ज्ञान उपलब्ध कराने के मकसद को पूरा करने में मदद मिलेगी। सरकार को एजुकेशनल सर्विसेज और प्रोडक्ट्स पर जीएसटी घटाने की भी जरूरत है। अभी इस पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है।
GDP का 6 फीसदी एजुकेशन पर खर्च करने की जरूरत
सूद ने कहा कि 1968 से एजुकेशन पर खर्च बढ़ाने की सिफारिशें की जा रही हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को अपनी जीडीपी का 6 फीसदी एजुकेशन पर खर्च करना चाहिए। सरकार को रिसर्च के लिए भी आवंटन बढ़ाने की जरूरत है। रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए स्कॉलरशिप, टेक्निकल ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाना होगा। इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का मॉडल अपनाया जा सकता है।
बजट 2023 आने में बाकी हैं सिर्फ कुछ दिन, इसकी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
2020 में जीडीपी का 4.5 फीसदी एजुक्शन पर हुआ था खर्च
वर्ल्ड बैंक के डेटा के मुताबिक, 2020 में एजुकेशन पर सरकार का खर्च जीडीपी का 4.5 फीसदी था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूनियन बजट 2023 में इसे बढ़ाने की जरूरत है। एक प्रमुख यूनिवर्सिटी के डीन एम किशोर बाबु ने कहा कि प्रतिष्ठित भारतीय एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के कैंपस विदेश में खोलने पर सरकार फोकस बढ़ा सकती है। मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और एमिटी यूनिवर्सिटी जैसे एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस विदेश में कैंपल शुरू कर रहे हैं।
ज्यादा संख्या में लोगों की स्किल बढ़ानी होगी
टेक्नोलॉजी टैलेंट के मामले में अभी मैनपावर की सप्लाई और जरूरत के बीच 21 फीसदी का गैप है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों में इंडिया में स्किल क्राइसिस रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार को एप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने की कोशिश करनी चाहिए। पिछले साल स्टाफिंग फर्म टीमलीज सर्विसेज ने 5,80,000 एप्रेंटिस को मौके देकर एक कीर्तिमान बनाया था। अगला लक्ष्य 10 लाख एप्रेंटिसेज का होना चाहिए। इसके लिए सरकार को निवेश बढ़ाना होगा।
केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़ाने पर फोकस बढ़ा है। कुछ राज्यों की सरकारें भी इसमें योगदान कर रही हैं। उत्तर प्रदेश की सरकार ने हर जिले में मेडिकल कॉलेज शुरू करने की योजना बनाई है।