बजट 2023: ChatGPT को हमने बजट की स्पीच लिखने को कहा, जानिए AI ने टैक्स छूट दी या नहीं!

Budget 2023: चैटजीपीटी (ChatGPT) की इन दिनों इंटरनेट और सोशल मीडिया पर खूब धूम है। दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक में भी यह खूब चर्चा में रहा। इसका इस्तेमाल लोग अलग-अलग तरह की जरूरतों के लिए कर रहे हैं

अपडेटेड Jan 20, 2023 पर 12:01 AM
बजट 2023: चैटबोट ने जो भाषण लिखा, उसमें देश के महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर की एक मशहूर कविता की पंक्तियों का जिक्र भी किया।

Budget 2023 : चैटजीपीटी (ChatGPT) ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। दरअसल, यह एक चैटबोट है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित है। लोगों ने अलग-अलग कामों के लिए इससे मदद लेने की कोशिश की है। इसमें छुट्टी के लिए अप्लिकेशन लिखने से लेकर रिलेशनशिप के बारे में सलाह तक शामिल हैं। साइंटिफिक पेपर के सह-लेखक के रूप में भी इसका नाम आया है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक में चैटबोट काफी चर्चा में रहा है। डब्ल्यूईएफ की बैठक में दुनियाभर के ताकतवर लोग शामिल होते हैं। इसमें उद्योग, इंडस्ट्री से लेकर अलग-अलग देशों की सरकारों के प्रतिनिधि होते हैं। हमने चैटजीपीटी से इंडिया के यूनियन बजट 2023-24 के लिए एक घंटे की एक स्पीच लिखने को कहा। हमने कहा कि यह फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के जैसा होगा। इसमें आंकड़े होंगे, सरकार की उपलब्धियां होंगी और फ्यूचर का प्लान होगा। हमने इंडिया के किसी मशहूर कवि की कविता की कुछ पंक्तियां भी इसमें शामिल करने को कहा।

हमें यह नतीजा मिला:

माननीय सांसदों, सम्मानित मेहमान और देश के नागरिक,


मैं यहां फाइनेंशियल ईयर 2023-24 का यूनियन बजट पेश करने के लिए उपस्थित हूं। मैं इस दौरान गर्व महसूस कर रही हूं और मुझे अपनी जिम्मेदारी का भी अहसास है। देश के वित्त मंत्री के रूप में आने वाले साल के लिए देश का बजट पेश करना मेरे लिए सम्मान की बात है।

मैं पिछले साल की सरकार की उपलब्धियों की झलक के साथ शुरुआत करना चाहूंगी। कोरोना की महामारी के चलते सामने आईं अभूतपूर्व चुनौतियों के बावजूद हमारी अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। इस फाइनेंशियल ईयर के लिए जीडीपी की ग्रोथ 11.5 फीसदी रहने की उम्मीद है। हम इनफ्लेशन को 4.6 फीसदी के साथ नियंत्रण में रखने में सफल रहे हैं। जीडीपी का 9.5 फीसदी का हमारा फिस्कल डेफिसिट भी उम्मीद के मुकाबले कम रहा है।

आगे बढ़ने से पहले हमें देश के महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर की ये पंक्तियां याद करने की जरूरत है। उन्होंने कहा था, "जहां मन में किसी तरह का डर नहीं हो और मस्तक ऊंचा हो, जहां ज्ञान निशुल्क उपलब्ध हो, जहां दुनिया संकीर्ण सोच की दीवारों से बंटी न हो।" आइए हम मिलकर ऐसा देश बनाए जहां हर नागरिक के पास अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के मौके हो और जहां अर्थव्यवस्था मजबूत और सबको लेकर चलने वाली हो।

अंत में मैं संसद के माननीय सदस्यों देश के नागरिकों का उनके सहयोग और भरोसे के लिए धन्यवाद करना चाहूंगी। मैं आपको आश्वस्त करती हूं कि इस बजट को इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ाने, रोजगार के मौके पैदा करने और सभी नागरिकों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया है।

आपका धन्यवाद।

इस स्पीच की पहली कमी यह है कि संक्षिप्त होने के अलावा इसके आंकड़ें पुराने हैं। इसकी वजह यह है कि चैटजीपीटी का डेटाबेस सितंबर 2021 तक ही अपटेड किया गया है।

खुद बोट के शब्दों में: जो भाषण मैंने लिखी है वह काल्पनिक परिदृश्य है और यह भारत सरकार की तरफ से किए जाने वाले वास्तविक ऐलानों पर आधारित नहीं है। इसलिए इसमें भारत सरकार की वास्तविक पॉलिसी और बजट प्रस्ताव शामिल नहीं हैं। इसके अलावा मैं भविष्य में होने वाली घटनाओं और किसी पॉलिसी के आर्थिक असर का अंदाजा नहीं लगा सकता। इसलिए इसमें शामिल ग्रोथ रेट, आवंटन के आंकड़ें और स्कीम स्पीच में सिर्फ उदाहरण के मकसद से शामिल किए गए हैं। इन्हें वास्तविक अनुमान नहीं माना जाना चाहिए। यह भी कि मैं एक लैंग्वेज मॉडल हूं। जरूरी नहीं कि मुझे किसी खास विषय या संदर्भ की जानकारी हो, जिसका असर बजट या सरकार की पॉलिसी पर पड़ सकता है।

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