अगले यूनियन बजट (Union Budget) में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर सरकार का फोकस हो सकता है। इसके तहत कुछ खास अपराधों और श्रम कानूनों को अपराध की कैटेगरी से बाहर किया जा सकता है। इस बारे में सभी पक्षों के साथ मंत्रालयों की शुरुआती बातचीत हुई है। मामले से जुड़े सूत्रों ने इस बारे में जानकारी दी है। इंडिया जैसे देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को पहली प्राथमिकता बनाने की जरूरत है। यहां काम करने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। इस दिशा में सरकार कई कदम उठा सकती है। इसके लिए प्रोसिजर, टैक्सेशन और लेबर लॉज सहित कई स्तर पर उपाय करने होंगे। श्रम कानून में 68.2 फीसदी प्रावधान अपराध के दायरे में आते हैं। सूत्र ने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए कॉमर्स मिनिस्ट्री और नीति आयोग की भी बातचीत हुई है। इस मसले पर हुई बैठकों में कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल भी शामिल थे।
हाल में पेश जन विश्वास विधेयक का मकसद 42 केंद्रीय कानूनों के तहत 183 छोटे अपराधों को अपराध की कैटेगरी से बाहर करना है। इनमें से 23 एक्ट में ऐसे 113 कंप्लायंसेज हैं जिनका असर आंत्रप्रेन्योर पर पड़ता है। 2019 से श्रम कानूनों में बदलाव करने की कोशिश हो रही है। इसके तहत 29 केंद्रीय अधिनियमों को चार कानूनों में बदला गया है। इस बारे में केंद्र और राज्य सरकारों ने जो ड्राफ्ट रूल्स प्रकाशित किए हैं उनसे संकेत मिलता है कि श्रम कानूनों में आपराधिक प्रावधान 80 फीसदी तक घट जाएंगे।
नए लेबर कोड जिसमें 29 श्रम कानूनों को शामिल किया गया है, उसे अभी स्थगित रखा गया है। ये काफी बड़े सुधार हैं। नए लेबर कोड्स 2019 में संसद में पेश किए गए थे। नए लेबर कोड लागू होने के बाद ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। सूत्र ने बताया कि केंद्र सरकार को नए लेबर कोड्स के मामले में ज्यादातर राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की सहमति मिल चुकी है। वर्ल्ड बैंक के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सर्वे में इंडिया की स्थिति बेहतर हुई है। इस सर्वे में 2015 में इंडिया 142वें पायदान पर था। 2020 में इंडिया 63वें पायदान पर आ गया। उसके बाद से यह सर्वे पेश नहीं किया गया है।
पिछले कुछ सालों में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की ग्लोबल रैंकिंग में इंडिया का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। लेकिन, वर्ल्ड बैंक के अब सर्वे प्रकाशित नहीं करने से इंडिया की ताजा स्थिति के बारे में पता नहीं चल पाया है। वर्ल्ड बैंक को संदेह था कि चीन ने 2018 के सर्वे को प्रभावित करने की कोशिश की थी। माना जाता है कि उसने सर्वे में अपनी रैंकिंग बढ़ाने के लिए ऐसा किया होगा। इसके बाद से वर्ल्ड बैंक ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सर्वे पेश करना बंद कर दिया।