10 का दम : म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM 46 लाख करोड़ के पार, लेकिन मुनाफे पर बढ़ा है टैक्स का बोझ

30 जून, 2014 को म्यूचुअल फंडों का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 9.75 लाख करोड़ रुपये था। 30 जून, 2023 को AUM 44.39 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। सितंबर के अंत में यह 46.57 लाख करोड़ पहुंच गया। ये आकंड़े एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के हैं

अपडेटेड Dec 13, 2023 पर 1:55 PM
इस साल की शुरुआत में फाइनेंस बिल में संशोधन के बाद म्यूचुअल फंड्स की स्कीमें तीन तरह के टैक्स के तहत आ गई हैं।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले 9 पूर्ण बजट म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स के लिए मिलेजुले रहे हैं। इस दौरान म्यूचुअल फंड्स स्कीम की पहुंच देश के छोटे शहरों तक पहुंची। 30 जून, 2014 को म्यूचुअल फंडों का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 9.75 लाख करोड़ रुपये था। 30 जून, 2023 को AUM 44.39 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। सितंबर के अंत में यह 46.57 लाख करोड़ पहुंच गया। ये आकंड़े एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के हैं। पिछले सालों में टैक्स के कुछ नियमों में सरकार के बदलाव करने से म्यूचुअल फंड्स के निवेशकों को झटका लगा है।

टैक्स के नियमों में बदलाव

सरकार ने 2014 में पेश पूर्ण बजट में डेट म्यूचुअल फंड्स स्कीमों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) टैक्स बढ़ा दिया था। इसे 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया था। लॉन्ग टर्म डेट फंड्स की यूनिट्स के लिए होल्डिंग पीरियड भी 12 महीने से बढ़ाकर 36 महीने कर दिया गया था। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के बजट में म्यूचुअल फंड्स के निवेशकों को फिर बड़ा झटका लगा। सरकार ने इक्विटी में 35 फीसदी से कम इनवेस्ट करने वाले डेट फंडों के कैपिटल गेंस टैक्स और इंडेक्सेशन बेनेफिट्स को हटा दिया था।


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टैक्स के लिए म्यूचुल फंड्स स्कीम्स की तीन कैटेगरी

इस साल की शुरुआत में फाइनेंस बिल में संशोधन के बाद म्यूचुअल फंड्स की स्कीमें तीन तरह के टैक्स के तहत आ गई हैं। पहली कैटेगी में ऐसी स्कीमें आती हैं जो 35 फीसदी तक निवेश इक्विटी में करती हैं। दूसरी कैटेगरी में ऐसी स्कीमें आती हैं जिनका निवेश इक्विटी में 35-65 फीसदी तक होता है। तीसरी कैटेगीर में ऐसी स्कीमें आती हैं जिनका इक्विटी में निवेश 65 फीसदी से ज्यादा है।

1 लाख रुपये से ज्यादा के LTCG पर 10 फीसदी टैक्स

फाइनेंस बिल 2018 में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के गेंस पर 10 फीसदी टैक्स लगाया गया था। तब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि इक्विटी म्यूचुअस फंड्स से हुए 1 लाख रुपये से ज्यादा के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 10 फीसदी टैक्स लगेगा। सरकार के इस कदम से स्टॉक मार्केट्स को हैरानी हुई थी।

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ELSS का एयूएम 1.75 लाख करोड़ पहुंचा

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 2014 में अपने पहले बजट में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी थी। सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक इनवेस्ट करने पर टैक्स बेनेफिट मिलता है। म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) सेक्शन 80सी के तहत आती हैं। लाइफ इंश्योरेंस स्कीम, पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि जैसी स्कीमें भी इस सेक्शन के तहत आती हैं। AMFI के मुताबिक, ELSS का एसेट अंडर मैनजमेंट (AUM) बढ़कर 30 जून, 2023 को 1.75 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। 30 जून, 2014 को यह 30,230 करोड़ रुपये था।

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