Union Budget 2024: हर साल तकरीबन इसी वक्त कंपनियां अपने एंप्लॉयीज से टैक्स सेविंग इनवेस्टमेंट और खर्चों के लिए सबूत मांगती हैं, ताकि संबंधित वित्त वर्ष के लिए उनके टैक्स लाइबिलिटी का आकलन किया जा सके। अगर टैक्स छूट की बात करें, तो पुरानी टैक्स रिजीम में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और मेडिकल खर्चों के लिए छूट का प्रावधान है। नई टैक्स रिजीम में ऐसी कोई छूट उपलब्ध नहीं है।
इनकम टैक्स के सेक्शन 80डी, 80डीडी और 80डीडीबी के मुताबिक, लोगों और हिंदू अविभाजित परिवारों को छूट की सुविधा उपलब्ध है। इन तीनों सेक्शन में सबसे कॉमन 80डी है। हम यहां बता रहे हैं कि इन सेक्शन किस तरह की छूट की मांग की जा सकती है:
टैक्सपेयर खुद और परिवार (स्पाउज और बच्चे) के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और हेल्थ चेक-अप से जुड़े 25,000 रुपये तक के खर्च पर छूट क्लेम कर सकते हैं। प्रिवेंटिव हेल्थ चेक अप के लिए सीमा 5,000 रुपये है, जबकि बाकी सीमा 20,000 रुपये है। इसके अलावा, माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और प्रिवेंटिव हेल्थ चेक अप पर 25,000 रुपये के खर्च पर भी छूट मिल सकती है। अगर आपके माता-पिता या आप खुद वरिष्ठ नागरिक हैं, तो यह सीमा 50,000 रुपये तक हो सकती है। अगर वरिष्ठ नागरिकों के पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है, तो सेक्शन 80डी में 50,000 रुपये तक के मेडिकल खर्चों के लिए भी छूट का प्रावधान है।
टैक्स फर्म टैक्सबीरबल (TaxBirbal) के डायरेक्टर चेतन चांडक ने बताया कि मेडिकल कॉस्ट काफी बढ़ गई है और ऐसे में हेल्थ प्रीमियम और मेडिकल खर्चों की भी सीमा बढ़ाने की जरूरत है।
इस सेक्शन के तहत टैक्सपेयर को अपने ऐसे डिपेंडेंट के मेडिकल इलाज के खर्च पर टैक्स में छूट की अनुमति है, जो दिव्यांग है। इसमें टैक्सपेयर के लाइफ पार्टनर, बच्चे, माता-पिता, भाई या बहन शामिल हो सकते हैं। इसके तहत किसी एक वित्त वर्ष में 40 पर्सेंट या इससे ज्यादा दिव्यांगता वाले शख्स पर 75,000 रुपये तक के खर्च पर टैक्स में छूट का प्रावधान है। इसके अलावा, 80 पर्सेंट से ज्यादा दिव्यांग शख्स के लिए यह रकम 1.25 लाख रुपये है। छूट क्लेम करने के लिए टैक्सपेयर को संबंधित मेडिकल अथॉरिटी द्वारा जारी किया गया सर्टिफिकेट मुहैया कराना जरूरी है।
यह सेक्शन टैक्सपेयर या उन पर निर्भर परिवार के सदस्यों की कुछ खास बीमारियों के इलाज पर हुए खर्च पर टैक्स में छूट का प्रावधान पेश करता है। इसके तहत किसी फाइनेंशियल ईयर में 40,000 रुपये तक की रकम पर छूट क्लेम की जा सकती है। अगर कोई शख्स वरिष्ठ नगारिक है, तो छूट की सीमा बढ़कर 1,00,000 रुपये हो सकती है।
इन बीमारियों में पार्किन्सन, कैंसर, डिमेंशिया आदि शामिल हैं। इसके लिए संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर का सर्टिफिकेट उपलब्ध कराना जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 40,000 रुपये की सीमा कई साल पहले तय की गई थी और उसके बाद से मेडिकल इनफ्लेशन काफी बढ़ गया है, लिहाजा सरकार इस सीमा को बढ़ाने पर फिर से विचार कर सकती है।