नई GDP सीरीज ने बदली अर्थव्यवस्था की तस्वीर, निर्माण में निजी कंपनियों की हिस्सेदारी दोगुने से ज्यादा

नई GDP सीरीज ने अर्थव्यवस्था के कई सेक्टरों की तस्वीर बदल दी है। निर्माण में निजी कंपनियों का GVA हिस्सा दोगुने से ज्यादा बढ़ा है। वहीं होटल, सड़क परिवहन और मैन्युफैक्चरिंग में नए आंकड़ों ने पुराने अनुमानों को बदल दिया है। कृषि में घरेलू क्षेत्र का दबदबा कायम है।

अपडेटेड Sep 21, 2026 पर 11:07 PM
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नई GDP सीरीज में पहले के मुकाबले ज्यादा सर्वे और सरकारी डेटा का इस्तेमाल किया गया है।

भारत की नई GDP सीरीज ने अर्थव्यवस्था के कई बड़े सेक्टरों की तस्वीर बदल दी है। खासकर निर्माण क्षेत्र के GVA (ग्रॉस वैल्यू एडेड) में बड़ा बदलाव दिखा है। GVA का मतलब किसी सेक्टर ने अर्थव्यवस्था में कितनी नई वैल्यू जोड़ी। नई सीरीज के मुताबिक, यहां निजी कंपनियों की हिस्सेदारी पहले के अनुमान से दोगुने से भी ज्यादा हो गई है।

वहीं, होटल और रेस्तरां सेक्टर में तस्वीर उलट है। यहां घरेलू कारोबार की हिस्सेदारी बढ़ी है। सड़क परिवहन और कुछ दूसरे सेक्टरों में भी नए आंकड़ों ने पुराने अनुमानों को बदला है।

निर्माण में निजी कंपनियों का GVA बढ़ा


नई 2022-23 बेस सीरीज में निर्माण क्षेत्र में निजी कंपनियों का GVA ₹7.46 लाख करोड़ आंका गया है। पुरानी 2011-12 बेस सीरीज में यह सिर्फ ₹3.53 लाख करोड़ था। यानी नए आंकड़ों में इसमें 111% की बड़ी बढ़ोतरी हुई है।

दूसरी ओर, घरेलू क्षेत्र से जुड़े निर्माण GVA को घटाया गया है। यह ₹17.12 लाख करोड़ से घटकर ₹12.37 लाख करोड़ रह गया है। यानी इसमें 27.8% की कमी हुई है।

सरकारी क्षेत्र के निर्माण GVA में भी बढ़ोतरी हुई है। यह 23.3% बढ़कर ₹1.30 लाख करोड़ हो गया है। हालांकि, पूरे निर्माण क्षेत्र का GVA बहुत ज्यादा नहीं बदला है। नई सीरीज में यह ₹21.13 लाख करोड़ है, जबकि पुरानी सीरीज में ₹21.71 लाख करोड़ था।

इस बदलाव से निर्माण क्षेत्र में निजी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 35.3% हो गई है। पुरानी सीरीज में यह सिर्फ 16.3% थी। वहीं, घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 79% से घटकर 58.5% रह गई है।

सीधे शब्दों में कहें तो नई GDP सीरीज निर्माण क्षेत्र को पहले के मुकाबले ज्यादा संगठित और कॉरपोरेट सेक्टर से जुड़ा हुआ दिखाती है।

होटल और रेस्तरां में उलटी तस्वीर

होटल और रेस्तरां सेक्टर में कहानी अलग है। यहां घरेलू कारोबार की हिस्सेदारी बढ़ी है। नई सीरीज में घरेलू क्षेत्र का GVA ₹1.45 लाख करोड़ से बढ़कर ₹1.69 लाख करोड़ हो गया है।

इसके उलट, निजी कंपनियों का GVA ₹1.19 लाख करोड़ से घटकर ₹1.09 लाख करोड़ रह गया है। इस सेक्टर का कुल GVA भी बढ़ा है। यह 5.7% बढ़कर ₹2.80 लाख करोड़ हो गया है।

अब होटल और रेस्तरां के GVA में घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 60.6% है। पुरानी सीरीज में यह 54.6% थी। वहीं, निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 44.9% से घटकर 39.1% रह गई है।

MoSPI निजी कंपनियों के आंकड़ों के लिए MCA-21 की कंपनी फाइलिंग का इस्तेमाल करता है। घरेलू कारोबार का अनुमान लगाने के लिए अब वर्कफोर्स से जुड़े सर्वे और प्रति कर्मचारी वैल्यू एडेड के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

सड़क परिवहन में भी बड़ा बदलाव

सड़क परिवहन में निजी कंपनियों का GVA काफी कम कर दिया गया है। नई सीरीज में यह ₹54,788 करोड़ है। पुरानी सीरीज में यह आंकड़ा ₹1.25 लाख करोड़ था। यानी इसमें 56.1% की कमी की गई है।

घरेलू क्षेत्र का GVA भी घटा है। लेकिन यहां गिरावट सिर्फ 9.2% रही। नई सीरीज में घरेलू क्षेत्र का GVA ₹5.15 लाख करोड़ है।

मैन्युफैक्चरिंग में बदलाव इतना बड़ा नहीं है। घरेलू क्षेत्र का GVA करीब 10% बढ़ा है। दूसरी ओर, निजी कंपनियों का GVA 3.7% घटा है।

इससे मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी 13.3% से बढ़कर 14.8% हो गई है। निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 80.6% से घटकर करीब 78.8% रह गई है।

रियल एस्टेट में भी घरेलू कारोबार का हिस्सा बढ़ा

रियल एस्टेट, मकानों के मालिकाना हक और प्रोफेशनल सर्विसेज में भी घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ी है। नई सीरीज में घरेलू GVA 21.3% बढ़ा है।

वहीं, निजी कंपनियों के GVA में सिर्फ 2.7% की बढ़ोतरी हुई है। इस पूरी कैटेगरी का GVA 10.1% बढ़ा है।

कृषि में घरेलू क्षेत्र का दबदबा कायम

कृषि, वानिकी और मछली पालन में तस्वीर ज्यादा नहीं बदली है। इस सेक्टर के GVA में 96% से ज्यादा हिस्सा घरेलू क्षेत्र का है।

2022-23 के लिए घरेलू GVA को ₹42.73 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹45.80 लाख करोड़ किया गया है। यानी नई सीरीज में भी कृषि का बड़ा हिस्सा छोटे और घरेलू कारोबार से ही जुड़ा माना गया है।

नई सीरीज में पुराने आंकड़े भी

नई GDP सीरीज में पहले के मुकाबले ज्यादा सर्वे और सरकारी डेटा का इस्तेमाल किया गया है। फिर भी कुछ जगह पुराने आंकड़ों पर निर्भरता बनी हुई है।

उदाहरण के लिए, खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल इंजनों की संख्या का अनुमान 1997 और 2003 की Livestock Census के आंकड़ों से लगाया गया है। नई जानकारी नहीं मिलने के कारण 2015-16 के बाद भी इसी अनुमान को आगे बढ़ाया गया है।

कृषि की मार्केटिंग लागत के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। पहले 2004-05 की एक स्टडी के आधार पर इसे फसल उत्पादन का 3.22% माना गया था।

नई सीरीज में जिन राज्यों ने अपनी जानकारी दी है, वहां नए और राज्यवार आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन जहां जानकारी नहीं मिली, वहां अब भी 3.22% वाला पुराना अनुपात ही लागू है।

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