पिछले 2-3 सालों में इनकम टैक्स (Income Tax) के मामले में बड़े बदलाव आए हैं। सरकार ने 2020 में इनकम टैक्स की नई रीजीम (Income Tax New Regime) शुरू की थी। टैक्स रिटर्न फाइलिंग में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा है। फेसलेस एसेसमेंट की शुरुआत हुई है। अब इनकम टैक्स रिटर्न की जल्द प्रोसेसिंग हो रही है। रिफंड्स भी जल्द इश्यू हो रहे हैं। पिछले कुछ सालों में दोनों ही रीजीम में टैक्स लायबिलिटी घटी है। टैक्स की ओल्ड रीजीम में 5 लाख रुपये तक की इनकम पर अब टैक्स जीरो हो गया है। नई रीजीम में 7 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर टैक्स जीरो हो गया है। हालांकि, TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) का रेट बढ़ने से विदेश जाना महंगा हो गया है। विदेश में निवेश करने के लिए भी अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। टीसीएस के रेट को 5 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। आइए इनकम टैक्स से जुड़ी उन पांच अच्छी चीजों के बारे में जानते हैं जो पिछले कुछ सालों में शुरू की गई हैं।
इनकम टैक्स की नई रीजीम 2020 में शुरू हुई थी। इस रीजीम में टैक्स के रेट्स कम हैं लेकिन डिडक्शंस और एग्जेम्पशंस के फायदे नहीं मिलते हैं। बजट 2023 में नई टैक्स रीजीम में 7 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर रिबेट का ऐलान किया गया था। इससे 7 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर टैक्स जीरो हो जाता है। साथ ही नई रीजीम में भी 50,000 रुपये सालाना स्टैंडर्ड डिडक्शन देने का भी ऐलान हुआ था। इससे नई टैक्स रीजीम अट्रैक्टिव हो गई है।
इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम में सालाना 5 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है। कई तरह के डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस का दावा करने पर 'टैक्स-फ्री लिमिट' और बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए अगर नौकरी करने वाले किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 7 लाख रुपये है तो सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये के डिडक्शंस का दावा करने पर 50,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन की वजह से उसकी टैक्स लायबिलिटी जीरो हो जाती है।
3. फेसलेस एसेसमेंट एंड अपील
इनकम टैक्स एसेसमेंट और अपील की प्रक्रिया को मैनुअल की जगह फेसलेस बना दिया गया है। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिलने पर टैक्सपेयर्स अपने रजिस्टर्ड ई-फाइलिंग अकाउंट के जरिए इलेक्ट्रॉनिक तरीके से उसका जवाब दे सकते हैं।
4. प्री-फिल्ड आईटीआर फॉर्म, AIS, फॉर्म 26एएस
अब इनकम टैक्स रिटर्न भरने में किसी इनकम के छूट जाने की संभावना नहीं के बराबर रह गई है। इस वजह से टैक्सपेयर्स को नोटिस मिलने के मामलों में काफी कमी आई है। एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS की शुरुआत से ऐसा हुआ है। इनमें टैक्सपेयर्स के फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड होते हैं।
5. ITR और रिफंड की जल्द प्रोसेसिंग
पिछले कुछ सालों में इनकम टैक्स रिटर्न की प्रोसेसिंग और रिफंड में लगने वाला समय काफी कम हो गया है। CII की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल 53 फीसदी से ज्यादा टैक्सपेयर्स ने कहा कि उनके बैंक अकाउंट में रिफंड आने में एक महीने से कम समय लगा।