इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नई टैक्स रीजीम की शुरुआत करने के साथ ही टैक्स-फाइलिंग की प्रकिया को आसान बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का व्यापक इस्तेमाल शुरू किया है। उदाहरण के लिए स्मॉल बिजनेसेज के टैक्स ऑडिट के लिए लिमिट 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है। 75 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट दे दी गई है। ऑनलाइन इंफॉर्मेशन पर फोकस बढ़ाने से ऐसा हुआ है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट लगातार डिजिटल इंफॉर्मेशन के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है। वह इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स की इनकम और खर्च से जुड़े डेटा कई स्रोतों से हासिल कर रहा है। इनमें इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड, ज्वेलर्स, कार रेजिस्ट्रेशन, स्कूल और रियल एस्टेट शामिल हैं। इसका असर देखने को मिला है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले लोगों की संख्या 7.85 करोड़ पहुंच गई है। एक दशक पहले यह 3.36 करोड़ थी। FY24 में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 12.37 लाख करोड़ (9 नवंबर, 2023 तक) पहुंच गया है। FY13-14 में यह 6.38 था।
टैक्स बेस बढ़ाने के लिए डेटा का इस्तेमाल
TDS का दायरे पिछले सालों में बढ़ाया गया है। पहले सिर्फ फिक्स्ड डिपॉजिट और सैलरी से होने वाली इनकम टीडीएस के दायरे में आती थीं। अब कई चीजे इसके दायरे में आ रही हैं। रेंट पेमेंट, विदेश में निवेश, कमीशन और विदेश यात्रा को भी इसके दायरे में ला दिया गया है। इससे टैक्स चोरी करना मुश्किल हो गया है। इनकम टैक्स फॉर्म प्री-फिल्ड आ रहे हैं। ज्यादातर डिटेल इसमें भरी होती हैं। टैक्सपेयर्स को सिर्फ उन्हें वेरिफाय करने की जरूरत होती है। सैलरीड एंप्लॉयी के लिए ITR-1 सहज और सेल्फ-एंप्लॉयड लोगों के लिए ITR-4 सुगम की शुरुआत की गई है।
एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS)
AIS की शुरुआत से टैक्सपेयर्स के लिए चीजें आसान हो गई हैं। वे एक ही जगह पर टीडीएस, टीसीएस, शेयर, रियल एस्टेट और म्यूचुअल फंड्स सहित हाई वैल्यू के सभी ट्रांजेक्शन देख सकते हैं। इससे इनकम टैक्स रिटर्न में किसी इनकम को छुपाना मुश्किल हो गया है।
रिफंड्स की प्रक्रिया में सुधार
अब इनकम टैक्स रिटर्न की प्रोसेसिंग बहुत कम समय में हो रही है। इस वजह से रिफंड्स की प्रोसेसिंग में लगने वाला समय भी घट गया है। पहले टैक्सपेयर्स को रिफंड का पैसा चेक के जरिए भेजा जाता था। इस प्रोसेस में काफी समय लगता था। कई बार फ्रॉड भी होता था। अब रिफंड का पैसा सीधे टैक्सपेयर्स के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
टैक्स कलेक्शन में करप्शन खत्म करने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने फेसलेस एसेसमेंट की शुरुआत की है। इसमें टैक्सपेयर्स और टैक्स एसेसिंग अफसर के बीच सिर्फ ऑनलाइन कम्युनिकेशन मुमकिन है। इससे टैक्सपेयर्स को काफी फायदा है। उसे बार-बार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ऑफिस का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं रह गई है।