अगले 12 महीनों में शेयर मार्केट्स पर सबसे ज्यादा असर लोकसभा चुनावों का पड़ेगा। Morgan Stanley के मैनेजिंग डायरेक्टर रिद्धम देसाई (Ridham Desai) ने यह अनुमान जताया है। लोकसभा के चुनाव अगले साल अप्रैल-मई में होने की संभावना है। देसाई ने मनीकंट्रोल से बातचीत में स्टॉक मार्केट्स और इनवेस्टमेंट्स के बारे में कई अहम बातें बताईं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve के इंटरेस्ट रेट में कमी करने से पहले इंडिया में RBI के इंटरेस्ट घटाने की उम्मीद नहीं है। अगर अमेरिकी इकोनॉमी की सेहत सुधरती है तो यह इंडिया के लिए अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि अगले 12 महीनों में निम्नलिखित 6 चीजों को ध्यान में रखने की जरूरत है:
अगले साल कई बड़े इवेंट्स हैं। इनमें सबसे बड़ा लोकसभा चुनाव है। इसका असर स्टॉक मार्केट्स पर पड़ेगा। लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई में होने की उम्मीद है। देसाई ने कहा कि मेरा मानना है कि मार्केट को भाजपा के फिर से केंद्र में सरकार बनाने की उम्मीद है। चुनाव के नतीजों के बाद ही इनवेस्टर्स आगे की रणनीति के बारे में सोचेंगे।
कच्चे तेल की कीमतें इंडियन स्टॉक मार्केट्स के लिए बहुत अहम हैं। इसकी वजह यह है कि इंडिया अपनी जरूरत के 80 फीसदी क्रूड ऑयल का आयात करता है। अगर क्रूड ऑयल की कीमतें 110-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं तो यह इंडियन इकोनॉमी के लिए अच्छा नहीं होगा। अगर कच्चे तेल की कीमतें इस लेवल से नीचे रहती हैं तो मुश्किल नहीं आएगी।
3. इंटरेस्ट रेट्स पर फेडरल रिजर्व का फैसला
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का इंटरेस्ट रेट को लेकर फैसला इंडिया के लिए काफी अहम होगा। देसाई ने कहा कि हमें फेडरल रिजर्व के कदम पर नजर रखनी होगी, क्योंकि अगर फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में कमी करने का फैसला करता है तो इसका असर RBI पर भी पड़ेगा। इससे RBI के रुख में नरमी आ सकती है। अमेरिका में इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि अगले साल जून में इंटरेस्ट रेट में कमी हो सकती है।
4. कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ
इंडिया में कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ आगे अच्छी रहने की उम्मीद है। कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन के रास्ते में किसी तरह की मुश्किल नहीं दिख रही। अगर अर्निग्स ग्रोथ आगे अच्छी बनी रहती है तो इसका असर स्टॉक मार्केट्स पर पड़ेगा।
5. अमेरिकी इकोनॉमी की ग्रोथ
अमेरिका में ग्रोथ साइकिल पर नजर रखनी जरूरी है। अगर अमेरिकी इकोनॉमी की सेहत बेहतर रहती है तो यह इंडिया के लिए भी अच्छा रहेगा। अमेरिका में रिसेशन की उम्मीद नहीं दिख रही। अमेरिकी इकोनॉमी की सॉफ्ट लैंडिंग इंडिया के लिए भी फायदेमंद रहेगी।
6. चीन की इकोनॉमी में रिकवरी
अगर चीन की इकोनॉमी पटरी पर लौटती है तो इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा। कमोडिटी की कीमतों में तेजी देखने को मिलेगी। चीन की सरकार इकोनॉमी को सहारा देने के उपाय कर रही है। हमें देखना होगा कि इन कोशिशों के नतीजे कैसे रहते हैं।