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Budget 2020: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण से रेल बजट को कैसी हैं उम्मीदें, कितनी होंगी पूरी

उम्मीद जताई जा रही है कि इस बजट में राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर के लिए रोडमैप की घोषणा की जा सकती है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 01, 2020 पर 12:10 PM
Budget 2020: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण से रेल बजट को कैसी हैं उम्मीदें, कितनी होंगी पूरी

आज साल 2020 का आम बजट फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। मोदी सरकार के पहले रेल बजट अलग पेश किया जाता था। जिसे साल 2017-18 में रेल बजट को अलग से पेश करने के बजाय से आम बजट में जोड़ दिया गया। यानी 92 साल की पुरानी परंपरा खत्म हो गई।

आज पेश होने वाले बजट में उम्मीद जताई जा रही है कि फाइनेंस मिनिस्टर राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर के लिए रोडमैप की घोषणा कर सकती है। जिसमें सुरक्षा बढ़ाने के साथ –साथ उसमें कैपिसिटी बढ़ाने की प्रक्रिया, मॉडर्न इन्फ्रस्ट्रक्चर को शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही 6 नई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, ट्रेन की स्पीड बढ़ाने के लिए मल्टीट्रैकिंग और पैसेंजर ट्रेन चलाने वाले निजी ऑपरेटरों पर खास फोकस कर सकती हैं।  पिछले पांच सालों में रेलवे के लिए पूंजी की लागत और बजटीय सपोर्ट में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि इस दौरान इन्वेस्टमेंट में सुस्ती छाई रही।

साल 2019-20 के केंद्रीय बजट में फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के लिए इंडियन के लिए   65,837 करोड़ रुपये उसकी विस्तार योजनाओं के लिए दिए गए थे। क्योंकि यह संस्था बुनियादी ढांचे के दौर से गुजर ही थी।

यह अनुमान जताया गया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए साल 2018 से 2030 के बीच 50 लाख करोड़ रुपये निवेश की जरूरत होगी। जिसमें यह देखते हुए रेलवे की पूंजीगत व्यय हर साल तकरीबन 1.5 से 1.6 लाख करोड़ है। सभी स्वीकृत प्रोजेक्ट्स को पूरा होने में दशकों लगेंगे। लिहाजा जुलाई में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कहा था कि  रेलवे में तेजी से विकास और अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का उपयोग करने का प्रस्ताव है।   

दूसरी सबसे खास बात ये है कि रेलवे रेल परिचालन अनुपात (operating ratio-OR) पर विशेष ध्यान देगा। क्योंकि परिचालन अनुपात में गिरावट के बीच करेंट फिस्कल ईयर में सुधार की संभावना कम है।

फिस्कल ईयर 2018-19 में रेलवे परिचालन अनुपात को 97.3 फीसदी से घटाकर करेंट फिस्कल ईयर में 95 फीसदी करने की तैयारी की जा रही है। अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती के चलते रेल परिचालन अनुपात पर इसका सीधा असर पड़ा है।

बता दें कि Comptroller Auditor General (CAG) की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017-18 में रेल परिचालन अनुपात 98.44 फीसदी दर्ज किया गया था। जो कि पिछले 10 सालों में सबसे खराब है। रेलवे में इस OR का मतलब यह है कि रेलवे ने 100 रुपये कमाने के लिये 98.44 रुपये खर्च किये।  

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