FMCG क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डाबर इंडिया (Dabur India), बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद (Patanjali Ayurved) के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गई है। डाबर ने आरोप लगाया है कि उसके च्यवनप्राश ब्रांड को निशाना बनाते हुए पतंजलि आयुर्वेद ने अपमानजनक विज्ञापन चलाया है। लीगल न्यूज वेबसाइट बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट की जज मिनी पुष्करणा ने मामले में एक नोटिस जारी किया है। साथ ही अंतरिम आदेशों पर विचार करने के लिए इसे जनवरी के अंतिम सप्ताह में सुनवाई के लिए लिस्ट किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डाबर इंडिया ने पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ इमीडिएट रिस्ट्रेनिंग ऑर्डर मांगे हैं। शुरुआत में जज ने मसले को हल करने के लिए मध्यस्थता का सुझाव दिया था, लेकिन डाबर की ओर से तत्काल राहत मांगे जाने के बाद मामले की सुनवाई करने का फैसला किया।
ऐसा क्या है पतंजलि के एड में
डाबर इंडिया के प्रतिनिधि अखिल सिब्बल ने कहा कि पतंजलि का विज्ञापन उपभोक्ताओं को गुमराह करता है, और यह दर्शाता है कि अन्य ब्रांड्स के पास च्यवनप्राश तैयार करने के ज्ञान या प्रामाणिकता का अभाव है। सिब्बल ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि च्यवनप्राश तैयार करने के लिए पहले से निर्धारित पैरामीटर मौजूद हैं, और 'साधारण' प्रोडक्ट होने का कोई भी आरोप डाबर जैसे कॉम्पिटीटर्स के लिए हानिकारक है। डाबर की च्यवनप्राश कैटेगरी में 61% से अधिक बाजार हिस्सेदारी है।
पतंजलि आयुर्वेद के विज्ञापन में फाउंडर स्वामी रामदेव कहते हैं, "जिनको आयुर्वेद और वेदों का ज्ञान नहीं, चरक, सुश्रुत, धन्वंतरि और च्यवनऋषि की परंपरा में असली च्यवनप्राश कैसे बना पाएंगे?" यह एड विभिन्न टीवी चैनलों पर चल रहा है और एक अखबार के दिल्ली एडिशन में भी छपा है।
वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने इस साल की शुरुआत में पतंजलि के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए यह भी कहा कि पतंजलि आयुर्वेद एक आदतन अपराधी है। पतंजलि आयुर्वेद की ओर से वरिष्ठ वकील जयंत मेहता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा और मुकदमे की स्थिरता पर भी सवाल उठाया।