नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) की दिल्ली बेंच ने रियल एस्टेट डेवलपर अजनारा इंडिया लिमिटेड (Ajnara India Ltd) के खिलाफ दिवालिया (Insolvency) कार्यवाही शुरू करने की याचिका मंजूर कर ली है। NCLT ने यह आदेश उसके प्रोजेक्ट अजनारा एंब्रोसिया (Ajnara Ambrosia) में घर खरीदने वाले कुछ खरीदारों की तरफ से दाखिल याचिका पर दिया है। मनीकंट्रोल ने आदेश की एक कॉपी देखी है।
आदेश में अमरपाल को आईआरपी नियुक्त किया गया है। खबर लिखे जाने तक अजनारा ने इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
आदेश में यह भी कहा गया है कि "मौजूदा एप्लिकेशन को IBC के सेक्शन 7 (5) के तहत स्वीकार किया गया है और इसके मुताबिक, मोरेटोरियम कोड के सेक्शन 14 के टर्म में घोषित किया गया है।" इसका मतलब है कि आदेश की तारीख से मोरेटोरियम अवधि के दौरान बिल्डर के खिलाफ कोई मुकदमा या कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती है। यह अवधि आदेश की तारीख से 180 दिनों तक होता है।
होमबॉयर मनीष कुमार गुप्ता ने 112 अन्य खरीदारों के साथ मिलकर अजनारा इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने की याचिका दाखिल की थी। इन सभी अजनारा एंब्रोसिया में घर खरीदने के लिए बिल्डर्स को पैसा दिया था।
जानकारी के मुताबिक, बिल्डर्स के पास नोएडा के सेक्टर 118 में प्लाट नं GH01 पर 1,42,967 स्क्वायर मीटर की जमीन थी और उसने यहां एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने के लिए कंपनियों और व्यक्तियों के साथ करार किया था।
बिल्डर बायर एग्रीमेंट के तहत, बिल्डर को करार साइन होने के 3 साल के अंदर करीब 1,600 यूनिट्स बनाकर उनकी चाबी खरीदारों को सौंपनी थी। आदेश में केस को लेकर जानकारी दी गई है, उसके मुताबिक बिल्डर ने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए खरीदारों से एडवांस पेमेंट लिया और कुल 50,47,48,426 रुपये का फाइनेंशियल डेट जुटाया, लेकिन वह फिर भी समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पाया और खरीदारों को चाबी सौंपने में असमर्थ रहा।