यूरोपियन सेंट्रल बैंक (European Central Bank) ने साल 2011 के बाद पहली बार गुरुवार 21 जुलाई को ब्याज दरें बढ़ाने (Interest rates Hike) का ऐलान किया। इसके साथ ही उसके एक नया बॉन्ड-खरीद प्रोग्राम भी लॉन्च किया, जिसका मकसद यूरो जोन (Euro Zone) के सबसे अधिक कर्ज में डूबे देशों के लिए उधार की लागत को काबू में रखना है।
यूरो जोन में लगातार बढ़ती महंगाई से निपटने की कोशिशों के तहत यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) ने अपना डिपॉजिट रेट 0.50 फीसदी बढ़ा कर जीरो पर्सेंट कर दिया। यह पिछली मीटिंग में दिए गए संकेत के मुकाबले दोगुनी बढ़ोतरी है। ECB के 11 साल में पहली बार रेट बढ़ाने के बाद शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट में गिरावट रही।
ECB ने इसके साथ अपने सप्ताहिक और रोजाना कैश नीलामी की दर भी 0.50% बढ़ाकर 0.75% कर दी है, जो पहले 0.25% थी। ECB ने यह संकेत दिया वह इस साल अभी इन तीनों दरों में और बढ़ोतरी कर सकती है।
ECB ने कहा, "गवर्निंग काउंसिल की आगामी बैठक में, ब्याज दरों को और सामान्यीकरण करने पर विचार होगा।" इसने आगे कहा, "आज की बढ़ोतरी के साथ हम नेगेटिव ब्याज दरों से बाहर निकल गए हैं। यह अब गवर्निंग काउंसिल को एक ब्याज दरों में एक बदलाव की इजाजत देगा, जिस हर बैठक के समय की परिस्थितियों के अनुसार विचार किया जाएगा।"
इसके साथ ही कर्ज लेने की बढ़ती लागत के असर को कम करने के लिए ECB ने एक नया टूल लॉन्च किया, जिसका नाम 'ट्रांसमिशन प्रोटेक्शन इंस्ट्रूमेंट (TPI)' दिया गया है। यह यूरो जोन के 19 देशों के बॉरोइंग लागत में किसी तरह का विचलन आने पर इसे बॉन्ड खरीदने की इजाजत देगा।
बता दें कि यूरो जोन के सेंट्रल बैंक ने पिछले 11 सालों से ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं की थी और साल 2014 से वहां डिपॉजिट रेट नकारात्मक में था।