भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार 21 जुलाई को बताया कि उसके मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की अगले महीने वाली बैठक को कुछ 'प्रशासनिक कारणों' से एक दिन के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक पहले 2 से 4 अगस्त तक होने वाली थी, जो अब 3 से 5 अगस्त को होगी।
मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) इस समय महंगाई को काबू में करने के दबाव से जूझ रही है, साथ ही उसके ऊपर ग्रोथ को भी संभालने का दबाव है। देश की खुदरा महंगाई दर जून में लगभग बिना किसी बदलाव के 7.01 फीसदी रही थी, जो इसके पिछले महीने यानी मई में 7.04 फीसदी था। खुदरा महंगाई दर को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के जरिए मापा जाता है।
इसके साथ ही वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून तिमाही में औसत खुदरा महंगाई दर 7.3 रही। यह RBI के जताए अनुमान 7.5 फीसदी से 0.20 फीसदी कम रहा। हालांकि फिर भी यह राहत की बात नहीं हैं क्योंकि सेंट्रल बैंक लगातार अपने लक्ष्य को चूक रहा है।
मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) को तब अपने उद्देश्य में विफल माना जाता है, जब लगातार तीन तिमाही में औसत खुदरा महंगाई दर उसके लक्ष्य से बाहर हो। आरबीआई ने महंगाई दर 2 से 6 फीसदी के बीच रखने का लक्ष्य रखा है। हालांकि जून तिमाही में औसत खुदरा महंगाई दर 7.3 फीसदी रही। जबकि इससे पहले जनवरी मार्च तिमाही में यह 6.3 फीसदी थी। इस तरह RBI अपनी विफलता से बस एक तिमाही दूर है।
इसके अलावा MPC की अगली बैठक में एक अहम मुद्दा यह भी होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक की पॉलिसी कैसे आगे आकार लेती है। फेडरल रिजर्व की इसी 26-27 जुलाई को बैठक होनी है और उम्मीद की जा रही है कि महंगाई के बढ़ते दबाव को रोकने के लिए वह एक बार फिर ब्याज दरों में 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है।