महंगाई मापने का नया CPI Inflation सीरीज लाएगी सरकार, बदल जाएगा बेस ईयर, जानिए क्या होगा फायदा

CPI Inflation new series : इस बार नई सीरीज आने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। इसकी वजह यह है कि डेटा कलेक्शन के लिए टैबलेट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले डेटा कलेक्ट करने में 7-8 महीने का समय लग जाता था। इस बार बहुत कम समय लगने की उम्मीद है

अपडेटेड Jul 22, 2022 पर 12:40 AM
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कोरोना की महामारी की वजह से कंज्यूमर एक्सपेंडिचर सर्वे शुरू करने में देरी हुई।

इंडिया को जल्द CPI (Consumer price Index) इनफ्लेशन की नई सीरीज मिल जाएगी। इसके लिए कंज्यूमर एक्सपेंडिचर सर्वे चल रहा है। इसके लिए टैबलेट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। इकोनॉमिक स्टैटिस्टिक्स पर स्टैंडिंग कमेटी के हेड प्रणब सेन ने यह जानकारी दी।

सेन ने मनींकंट्रोल को बताया कि इस बार नई सीरीज आने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। इसकी वजह यह है कि डेटा कलेक्शन के लिए टैबलेट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले डेटा कलेक्ट करने में 7-8 महीने का समय लग जाता था। इस बार बहुत कम समय लगने की उम्मीद है।

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सेन ने हलांकि यह भी बताया कि टैबलेट्स के इस्तेमाल के बावजूद सीपीआई इनफ्लेशन की नई सीरीज अगले साल के अंत से पहले नहीं मिल पाएगी। राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों के बाद 2019 में ऑफिशियल डेटा की क्वालिटी में सुधार के लिए इकोनॉमिक स्टैटिस्टिक्स पर स्टैंडिंग कमेटी बनाई गई थी।

कोरोना की महामारी की वजह से कंज्यूमर एक्सपेंडिचर सर्वे शुरू करने में देरी हुई। आखिर में यह 1 जुलाई को शुरू हुआ। सर्वे 30 जुलाई, 2023 को खत्म होगा। इस सर्वे के आधार पर सीपीआई इनफ्लेशन अपडेट किया जाता है। सर्वे में न सिर्फ सीपीआई सीरीज का बेस ईयर बदल जाएगा बल्कि गुड्स एंड सर्विसेज के बास्केट में भी बदलाव आएगा। उनका वेटेज भी बदलेगा।

सीपीआई इनफ्लेशन की अभी जो सीरीज है वह 2011-12 (जुलाई-जून) कंज्यूमर एक्सपेंडिचर सर्वे पर आधारित है। इस सीरीज को फरवरी 2015 में रिलीज किया गया था। तब डेटा कलेक्शन में ढाई साल से ज्यादा वक्त लगा था।

सरकार ने 2017-18 (जुलाई-जून) में कंज्यूमर एक्सपेंडिचर सर्वे किया था। लेकिन, उसने इसे रिलीज करने से इनकार कर दिया। उसने इसके लिए वजह डेटा की खराब क्वालिटी बताई। रिटेल इनफ्लेशन की सही माप के लिए सीपीआई सीरीज को अपडेट किया जाता है। इससे मॉनेटरी पॉलिसी के फैसले लेने में मदद मिलती है।

सीपीआई की मौजूदा सीरीज में शामिल कई चीजों का इस्तेमाल बंद हो चुका है। डीवीडी प्लेटर्स और टेप रिकॉर्डर्स इसके उदाहरण हैं। इसके बावजूद सीपीआई इनफ्लेशन के बास्केट में ये शामिल हैं। आरबीआई इंटरेस्ट रेट में बदलाव के फैसले लेने के लिए सीपीआई इनफ्लेशन के डेटा पर विचार करता है।

अभी के सीपीआई इनफ्लेशन के बास्केट में फूड एवं बेवरेजेज का वेटेज 45.86 फीसदी है। यही वजह है कि खानेपीने की की चीजों में बदलाव का बड़ा असर रिटेल इनफ्लेशन के आंकड़ों पर पड़ता है।

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