केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत लोग अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का फायदा उठा सकते हैं। सरकार इसके लिए सब्सिडी भी दे रही है, ताकि लोगों पर ज्यादा खर्च का बोझ न पड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2024 को इस योजना की घोषणा की थी। इसका मकसद देश के 1 करोड़ गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को सोलर बिजली से जोड़ना है।
सोलर लगाने में कितना खर्च आता है?
भारत में फिलहाल छत पर सोलर सिस्टम लगाने का खर्च लगभग 60,000 से 80,000 रुपये प्रति किलोवाट (kW) तक आता है।
सरकार की सब्सिडी इस तरह मिलती है:
अगर कोई 3 kW से बड़ा सिस्टम लगाता है, तब भी अधिकतम सब्सिडी 78 हजार रुपये ही मिलेगी।
नीचे दी गई टेबल में खर्च, सब्सिडी और बचत की सभी डिटेल देखें:
कुछ राज्यों, जैसे उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त सब्सिडी भी मिलती है, जिससे खर्च और कम हो सकता है।
पैसा कितने साल में वापस निकल आता है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि:
मान लीजिए किसी घर ने 3 kW का सोलर सिस्टम लगाया, जिसकी कुल कीमत करीब 1.8 लाख रुपये है।
सरकारी सब्सिडी 78 हजार रुपये मिलने के बाद असली खर्च लगभग 1.08 लाख रुपये रह जाता है।
अगर उस घर का बिजली बिल हर महीने करीब 7,200 रुपये आता है और सोलर सिस्टम हर महीने लगभग 275 यूनिट बिजली बनाता है, तो करीब 2,200 रुपये महीने की बचत हो सकती है।
इस हिसाब से साल में लगभग 26 हजार रुपये की बचत होगी और करीब 4 साल में पूरा खर्च निकल सकता है।
अगर उत्तर प्रदेश जैसी जगह पर अतिरिक्त सब्सिडी मिल जाए, तो यह खर्च करीब 3 साल में भी निकल सकता है।
उसके बाद क्या फायदा होगा?
एक बार लागत निकलने के बाद अगले 20 साल या उससे ज्यादा समय तक बिजली का बिल काफी कम हो सकता है, क्योंकि ज्यादातर सोलर सिस्टम 25 साल तक चलते हैं।
अगर जरूरत से ज्यादा बिजली बनती है, तो उसे बिजली ग्रिड में भेजकर और भी बिल कम किया जा सकता है। इसे नेट मीटरिंग कहा जाता है।
सरकार ने बैंकों के जरिए बिना गारंटी वाले सोलर लोन की सुविधा भी शुरू की है, ताकि लोग आसानी से यह सिस्टम लगवा सकें।