मार्केट में पहली एंट्री का शुरुआती फायदा मिल सकता है लेकिन बिजनेस हिस्ट्री के हिसाब से यह इस बात की गारंटी नहीं देता है कि सबसे पुराना ही मार्केट में लंबे समय तक राज करेगा। स्मार्टफोन और इंटरनेट सर्च से लेकर सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट तक कई कंपनियों ने बाद में इंडस्ट्री में एंट्री की और लीडर बन गए। उन्होंने तेजी से अपने को बढ़ाया और ग्राहकों की जरूरतों को अधिक प्रभावी तरीके से अपनाया। इंडस्ट्री में पहली बार जिस कंपनी की एंट्री हुई, वे नए बाजार बनाते है या मौजूदा मार्केट को बदलते हैं लेकिन कई मामलों में ऐसा हुआ कि बाद में आने वाली कंपनियों ने शानदार प्रोडक्ट, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन और बेहतर इकोसिस्टम बनाकर मार्केट लीडर बन जाते हैं। यहां ऐसे ही पांच उदाहरण दिए जा रहे हैं, जहां बाद में आने वाली कंपनियों ने शुरुआती मार्केट लीडर को पछाड़ दिया
जून 2007 में जब एपल (Apple) ने आईफोन (iPhone) लॉन्च किया, तो उसने स्मार्टफोन इंडस्ट्री की तस्वीर ही बदल दी। इसने मॉडर्न टचस्क्रीन डिवाइस और ऐप-बेस्ड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए एक नया स्टैंडर्ड सेट किया। इसके 18 महीने से भी कम समय बाद अक्टूबर 2008 में गूगल ने एंड्रॉयड को एक ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम के तौर पर लॉन्च किया। एपल के इंटीग्रेटेड हार्डवेयर अप्रोच के विपरीत इसने सैमसंग (Samsung), एचटीसी (HTC) और मोटोरोला (Motorola) जैसी कई हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों के साथ साझेदारी की। इससे एंड्रायड को अलग-अलग प्राइस रेंज और इलाकों में तेजी से फैलने में मदद मिली। साल 2010 के आखिर तक यह दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बन चुका था और आगे भी बना रहा। आज भी लगभग 70% मार्केट शेयर के साथ यह दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बना हुआ है।
मायस्पेस (MySpace) अगस्त 2003 में आया और जल्द ही सबसे बड़ा सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म बन गया। इसके लाखों यूजर्स बने और इसने अरबों डॉलर की वैल्यूएशन हासिल की। फिर फरवरी 2024 में फेसबुक ने मार्केट में एंट्री की। शुरुआत में तो यह सिर्फ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के लिए था और सितंबर 2006 में इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया। साफ-सुथरे इंटरफेस, मजबूत आइडेंटिटी वेरिफिकेशन, अधिक दिलचस्प न्यूज फीड और कम स्पैम के जरिए इसने खुद को दूसरों से अलग बनाया। आम लोगों के लिए खुलने के लगभग 20 महीने बाद अप्रैल 2008 में फेसबुक ने ग्लोबल मंथली विजिटर्स के मामले में मायस्पेस को पीछे छोड़ दिया और 2009 तक इसने यूएस ट्रैफिक में भी पछाड़ दिया। यह सोशल मीडिया की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था।
गूगल से पहले इंटरनेट सर्च और वेब डायरेक्टरी पर 1994 में लॉन्च हुई याहू (Yahoo), 1994 में लॉन्च हुई लाइकोस (Lycos) और 1995 में लॉन्च हुई अल्टाविस्टा (AltaVista) जैसी कंपनियों का दबदबा था। फिर गूगल ने साल 1998 में पेज-रैंक (PageRank) के साथ मार्केट में एंट्री की। यह एक ऐसा सर्च एल्गोरिदम था जो सिर्फ वेबसाइटों की लिस्ट बनाने की बजाय, उनकी महत्ता यानी रेलेवेंस के आधार पर पेजों को रैंक करता था। इसने एक तेज़ और साफ-सुथरा होमपेज भी पेश किया, जो पोर्टल-स्टाइल वाले कॉम्पिटिटर्स से बिल्कुल अलग था। यही सादगी लोगों को भा गया। साल 2000 तक गूगल याहू का सर्च प्रोवाइडर बन गया और तेजी से एक प्रमुख सर्च इंजन के तौर पर उभरा। आगे चलकर ऑनलाइन सर्च का पर्यायवाची बन गया।
ब्लॉकबस्टर ने 80 के दशक के आखिरी से हजारों फिजिकल स्टोर के जरिए दुनिया के सबसे बड़े वीडियो रेंटल बिजनेस में से एक खड़ा किया। साल 1997 में नेटफ्लिक्स ने 'मेल के जरिए डीवीडी' सब्सक्रिप्शन मॉडल के साथ डीवीडी रेंटल मार्केट में एंट्री की। इसमें लेट फीस हटा दी गई और फिर साल 2007 में इसने सब्सक्रिप्शन-बेस्ड वीडियो स्ट्रीमिंग में कदम रखा। एक तरफ ब्लॉकबस्टर कर्ज और स्टोर पर ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रहा था, वहीं नेटफ्लिक्स नए डिलीवरी मॉडल और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन में निवेश करती रही। ब्लॉकबस्टर ने साल 2010 में दिवालिया होने के लिए अर्जी दी, तो नेटफ्लिक्स दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म में से एक बन गया।
मैग्नावॉक्स (Magnavox) ने 1972 में पहला होम वीडियो गेम कंसोल पेश किया था, लेकिन अटारी ने 1970 के दशक के आखिरी में अटारी 2600 के साथ इस कैटेगरी को मशहूर कर दिया। हालांकि सॉफ्टवेयर की गिरती क्वालिटी और मार्केट में जरूरत से अधिक सप्लाई की वजह से साल 1983 में वीडियो गेम इंडस्ट्री क्रैश हो गई। इसके बाद निनटेंडो ने अक्टूबर 1985 में निनटेंडो एंटरटेनमेंट सिस्टम के साथ नॉर्थ अमेरिकन मार्केट में एंट्री की। इसने गेम डेवलपर्स के लिए सख्त क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर ध्यान दिया और एक्सक्लूसिव फ्रेंचाइजी में भारी निवेश किया, जिससे इसका इकोसिस्टम मजबूत हुआ। साल 1988 तक नॉर्थ अमेरिकन कंसोल मार्केट के अधिकतर हिस्से पर निनटेंडो का कब्जा हो गया, जिससे इंडस्ट्री को फिर से खड़ा करने में मदद मिली और साथ ही अटारी का हार्डवेयर बिजनेस कमजोर पड़ गया।