बंगाल की खाड़ी में ग्रेट निकोबार द्वीप पर इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट पोर्ट प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को सरकार अंतिम रूप दे रही है। इस प्रोजेक्ट की लागत 41000 करोड़ रुपये है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि अगले कुछ महीनों में प्रोजेक्ट का काम शुरू होगा। ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट पोर्ट प्रोजेक्ट पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के कारण जांच के दायरे में है।
पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवेज सचिव टी के रामचंद्रन ने कहा, ‘‘इस प्रोजेक्ट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से पर्यावरण संबंधी मंजूरी मिल गई है और अब इसके इंप्लीमेंटेशन में कोई बाधा नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रोजेक्ट के DPR को भी अंतिम रूप दे दिया गया है और हम अगले कुछ महीनों में आगे इसका इंप्लीमेंटेशन शुरू करेंगे।’’
पिछले साल पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि इस प्रोजेक्ट के 41,000 करोड़ रुपये के निवेश से पूरा होने की उम्मीद है, जिसमें सरकारी निवेश और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) दोनों शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा, ‘‘ग्रेट निकोबार द्वीप पर इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट पोर्ट्स प्रोजेक्ट के लिए 11 कंपनियों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्रस्तुत किए हैं।’’ इन कंपनियों में लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड, एफकॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और जेएसडब्ल्यू इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड शामिल हैं।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित पोर्ट में हर साल 1.6 करोड़ कंटेनरों को हैंडल करने की अंतिम कैपिसिटी होगी। इसके पहले चरण को 2028 तक 18000 करोड़ रुपये की लागत से चालू किया जाएगा और यह 40 लाख से अधिक कंटेनरों को हैंडल करेगा। ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के आसपास अन्य प्रोजेक्ट्स में एक एयरपोर्ट, एक टाउनशिप और एक पावर प्लांट की योजना शामिल है। यह प्रोजेक्ट इंटरनेशनल ट्रेड रूट पर स्थित है, जिसके पास सिंगापुर, क्लैंग और कोलंबो जैसे मौजूदा ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल हैं।